बरेली। साढ़े तीन साल से ज्यादा समय गुजरने के बाद डॉ. मनीष मर्डर केस में अहम मोड़ आया है। क्राइम ब्रांच के सब इंस्पेक्टर विवेचक हरपाल सिंह की अर्जी पर कोर्ट में डॉ. मनीष की पत्नी डॉ. मीनाक्षी, उनके ससुर मुल्की सिंह और साले विपिन का लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की इजाजत दे दी है। अगर पुलिस का शक सही निकला तो जल्द इस रहस्यमय हत्याकांड का खुलासा हो जाएगा।
डॉ. मनीष की लाश बारादरी इलाके के सतीपुर के नाले में मिली थी। दरोगा भोलू सिंह भाटी ने लाश का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। पोस्टमार्टम में मनीष की मौत दम घुटने के होना पाई गई तो डॉ. मनीष की मौत के मामले को हत्या में तरमीम कर दिया गया। विवेचना के दौरान मनीष के पिता रामजीत सिंह ने अपनी पुत्रवधू डॉ. मीनाक्षी, उनके पिता मुल्की सिंह और भाई विपिन पर हत्या का षडयंत्र रचने का आरोप लगाया था।
क्राइम ब्रांच के विवेचक हरपाल सिंह ने बताया कि उनकी दरख्वास्त पर अदालत ने मनीष के पिता के प्रार्थना पत्र के आधार पर उनकी पत्नी, ससुर और साले का लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की इजाजत दे दी है। टेस्ट के दौरान आरोपी अपने अधिवक्ता रख सकते हैं लेकिन अधिवक्ता को परीक्षण की आंतरिक कार्रवाई में कोई हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होगा।
और रहस्यमय होता गया हत्याकांड
डॉ. मनीष की हत्या इंस्पेक्टर आरएस सरोज के कार्यकाल में हुई थी। इसके बाद इंस्पेक्टर श्यामरथी आर्या, गमलेश्वर बिल्टोरिया को थाना बारादरी की कमान मिली, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। गमलेश्वर के ट्रांसफर के बाद कुछ दिन थाने का चार्ज एसएसआई नेकराम सिंह पाल के पास रहा। इसके बाद इंस्पेक्टर शशांक चौधरी को बारादरी में तैनात कर दिया गया। 2012 में दंगे के दौरान चौधरी को हटाकर इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश शर्मा को तैनात किया गया। आईपीएस हेमंत कुटियाल के नेतृत्व में इंस्पेक्टर विनोद सिंह और एमएम खान भी घटना का खुलासा नहीं कर पाए। पिता रामजीत सिंह की गुजारिश पर एसएसपी आकाश कुलहरि ने आठ जून 2013 को विवेचना एसआईएस को ट्रांसफर कर दी थी।
यह था मामला
पांच अप्रैल 2011 की रात डा. मनीष कुमार की हत्या कर दी गई थी। अगले दिन उनकी लाश सतीपुर मोहल्ले के पास नाले में पड़ी मिली थी। उनके पिता रामजीत सिंह ने थाना बारादरी में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। डा. मनीष मूलरूप से आगरा में शाहगंज क्षेत्र की केसर बिहार कॉलोनी निवासी थे, और हल्द्वानी के डा. सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में बतौर चिकित्सक कार्यरत थे। घटना के दिन वह कानपुर से लौट रहे थे। उनके मोबाइल की आखिरी बार लोकेशन बरेली में मिली थी।