बरेली। नगर निगम की बोर्ड की शनिवार को हुई विशेष बजट का फोकस की आय बढ़ाने पर रहा। इसके लिए कुछ पुराने प्रावधानों को निरस्त किया गया तो कुछ नए नियमों को लागू किया गया। इसी बीच करीब 4.3 अरब का बजट पास हुआ। बताया गया कि 3.15 अरब से शहर में विकास कार्य होंगे, फिर भी 88.19 करोड़ रुपये की धनराशि नगर निगम के खजाने में शेष रहेगी। मेयर ने इस बीच दावा किया कि शहरियों पर टैक्स कम करने के बाद भी निगम की आय बढ़ी है, क्योंकि टैक्स कम होने से करदाता बढ़े हैं। बैठक में यह भी कहा गया कि सरकारी विभागों पर टैक्स का डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा बकाया है, अगर इस रकम की अदायगी हो जाए तो शहर की काया पलटी जा सकती है।
बजट के मुख्य बिंदु
केबिल ऑपरेटर से लेंगे टैक्स
शहर में केबिल नेटवर्क चला रहे ऑपरेटरों से नगर निगम टैक्स वसूलेगा। बजट में इसका प्रावधान किया गया है। मेयर ने बताया कि इसके लिए अन्य नगर निगमों से सुझाव मांगे जाएंगे। अगर उपयुक्त सुझाव नहीं मिले तो बायलाज बनाकर केबिल आपरेटरों को टैक्स के दायरे में लाया जाएगा।
‘ड्राइवर साहब’ सफाई करेंगे
बैठक के दौरान बताया गया कि वाहन चालक पद पर तैनात करीब 50 सफाईकर्मियों को वापस उनके मूल पद यानी सफाई कार्य में लगाया जाएगा। बता दें कि शासन ने काफी पहले ही इस संबंध में आदेश जारी किया था, लेकिन उस आदेश पर क्रियान्वयन नहीं किया गया था।
डोर-टू-डोर का बजट शून्य
पहले डोर-टू-डोर योजना के के तहत कंपनियों के दावों के निस्तारण के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान किया गया था। इसे पिछली बजट बैठक में घटाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया था। अब पार्षद राजेश अग्रवाल की मांग पर इस बजट को पूरी तरह शून्य कर दिया गया है।
फरवरी में ही सभी ठेके
बैठक में कहा गया कि नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए जरूरी है कि सारे ठेके समय पर हों ताकि उनसे आय अर्जित कर उसे विकास कार्यों पर खर्च किया जा सके। बताया गया कि विज्ञापन पट, फसल बहार, साइकिल स्टैंड, तालाब आदि के ठेकों को फरवरी में ही कराने को कहा है।
पुनरीक्षित बजट समय से
पार्षदों ने इस बात पर आपत्ति जताई कि पुनरीक्षित बजट और मूल बजट इस बार करीब तीन महीने की देरी से पेश किए गए हैं जबकि पुनरीक्षित बजट को अक्टूबर और मूल बजट को फरवरी में पेश किया जाना चाहिए। मेयर ने इस सुझाव पर अमल करने का आश्वासन दिया है।
टैक्स कम पर आय बढ़ी
मेयर ने बताया कि गृह कर में करीब 45 प्रतिशत तक कटौती की गई है फिर भी करदाता बढ़ने से निगम को करीब 20 प्रतिशत का फायदा हुआ है। कहा कि, पहले बढ़ी दरों से घबरा रहे लोग भी टैक्स अदा कर रहे हैं। वहीं, जीपीएस ट्रैकिंग से पकड़े में आए 40 हजार करदाताओं के कर अदा करने से आय बढ़ने की संभावना है।
150 करोड़ का बकाया दें सरकारी विभाग वर्ना सीज करेंगे खाते
करीब 15 वर्षों से तमाम सरकारी विभागों ने नगर निगम को टैक्स अदा नहीं किया है। इसके चलते करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये का टैक्स उन पर बकाया है। मेयर ने बताया कि सभी विभागों को नोटिस भेजा जा रहा है। कुछ विभागों ने इन नोटिस का जवाब दिया है। मेयर ने कहा कि विभागों पर बकाया टैक्स मिलने से बड़ी आय होगी। विकास कार्यों पर इस रकम के इस्तेमाल से शहर की काया पलट जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर विभाग टैक्स नहीं देेंगे तो उनके खाते सीज कर नियमानुसार वसूली की जाएगी।
पार्षदों ने समस्याओं पर मचाया हल्ला
बैठक की शुरुआत बोर्ड अध्यक्ष मेयर उमेश गौतम ने राजस्व लेखा विभाग के सामान्य गृहकर पर चर्चा से की। इसके बाद सामान्य गृहकर और म्यूटेशन जैसे मामलों पर ही करीब डेढ़ घंटे तक चर्चा चलती रही। म्यूटेशन प्रक्रिया को बेहतर बताने पर पार्षद सतीश कातिब मम्मा ने आपत्ति जताई। कहा, खुद उन्होंने चार मकानों के म्यूटेशन के लिए कहा गया था लेकिन अब तक एक का भी नहीं हुआ। इस पर मेयर ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को वार्ड में कैंप लगाकर म्यूटेशन और टैक्स के मामलों को निपटाने का निर्देश दिया। इसी दौरान दूसरे पार्षदों ने भी एक -एक कर अपने क्षेत्र की समस्याओं को रखना शुरू कर दिया। मेयर ने बजट पर चर्चा शुरू करने का सुझाव दिया लेकिन पार्षद अपनी-अपनी समस्या पर अड़े रहे। सफाई, सीवर, सड़क, प्रकाश व्यवस्था की शिकायतों का क्रम जारी रहा। सदन में मौजूद कई पार्षद एक ही बिन्दु पर घंटे भर तक चर्चा की वजह से सदन से बाहर निकल आए। इसके बाद एक घंटे में अन्य बिन्दुओं पर निर्णय लेकर करीब ढाई बजे बैठक समाप्त हो गई।
तीन सौ मीटर सड़क पर फूंक रहे चार करोड़.. ऐसा विकास
कागजी कार्रवाई से शहर का विकास नहीं होता। तीन सौ मीटर रोड के लिए चार करोड़ का बजट खर्च करके शहर का ‘अच्छा’ विकास हो रहा है। एक फ्लाईओवर बनवा सकें तो पिछले कार्यकाल पर प्रश्नचिह्नत लगाएं। - डॉ. आईएस तोमर, पूर्व मेयर
आय बढ़ाने से सिर्फ नगर निगम का विकास संभव है। शहर को सुनियोजित योजना के तहत विकसित किया जाना चाहिए। बैठक में बजट की आय के साथ ही विकास पर होने वाले खर्च पर ज्यादा जोर देना चाहिए। - डॉ. एके चौहान, वरिष्ठ चिकित्सक
नगर निगम में जिस समय मूल बजट आना चाहिए, उस दौरान रिवाइज बजट आया है। जो आया है उसमें भी खर्चे पास करने की संस्तुति देना चाहते थे। आय के टारगेट से पीछ़े हैं और खर्चे में आगे हैं। - राजेश अग्रवाल, पार्षद