बनते ही विवादों में घिरी भाजपा महानगर कार्यकारिणी
सब हेड
- दलित और महिलाओं की उपेक्षा, भाई भतीजावाद को बढ़ावा
- पुराने कार्यकर्ता दरकिनार, सपा-बसपा से आते ही पा गए मलाईदार पद
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। भाजपा की महानगर कार्यकारिणी बनते ही विवादों में घिर गई है। 24 सदस्यीय महानगर कार्यकारिणी में भाजपा की वोट बैंक रही दलित बिरादरियों (बाल्मीकि, खटिक-सोनकर, पासी, कोरी आदि) समाज की उपेक्षा की गई है। पूर्व महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया समर्थक यतिन भाटिया और मोहित कपूर की छुट्टी कर दी गई है। अनुसूचित जाति के नाम पर धोबी समाज के केवल एक कार्यकर्ता को जगह मिल पाई। वह भी अस्वस्थ होने की वजह से सक्रिय भी नहीं है। महिलाओं की भागेदारी भी पार्टी संविधान के हिसाब से कम हैं। जो हैं, वह भी पुरानी महिलाएं ही हैं। पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और भाई भतीजावाद को बढ़ावा मिलने से कार्यकर्ताओं में रोष है। कई पुराने कार्यकर्ता बगावत की राह पर हैं।
भाजपा महानगर अध्यक्ष डा. केएम अरोड़ा पद संभालने के बाद नई महानगर कार्यकारिणी गठन में देरी को लेकर पहले ही चर्चा में थे। देर से आई महानगर कार्यकारिणी की सूची सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कार्यकर्ता उबल पड़े। नई कार्यकारिणी में बड़े नेताजी के खास रवि रस्तोगी, देवेंद्र जोशी और राममूर्ति मौर्य को उपाध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है। आनंद जौहरी की उपाध्यक्ष पद से छुट्टी हो गई है। पूर्व विधायक सुमनलता सिंह के भाई अजय प्रताप सिंह अज्जू उपाध्यक्ष बनने में कामयाब रहे। लंबे समय से जमें शिव कुमार महेश्वरी इस बार भी संगठन में ऊंची पहुंच की वजह से टस से मस नहीं हुए। राजबहादुर सक्सेना और प्रभूदयाल लोधी उपाध्यक्ष पद पर बरकरार रखे गए हैं। सुभाषनगर में रहने वाले टेंट व्यापारी भी कार्यकारिणी में सम्मानजक पद पाने में कामयाब रहे। भाजपा सूत्रों के अनुसार लोकसभा चुनाव में टेंट की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इनको कार्यकारिणी में शामिल किया गया है। पिछली कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष रहे प्रत्येश पांडेय इस बार महानगर महामंत्री बने हैं।
फोटो- विष्णु शर्मा
सपा-बसपा से आने वालों की मौज
भाजपा में महानगर उपाध्यक्ष बने विष्णु शर्मा समाजवादी पार्टी ब्राह्मण सभा के महानगर अध्यक्ष रह चुके हैं। सूत्रों के अनुसार भाजपा में उनको उपाध्यक्ष पद दिलाने में आरएसएस के एक नेता की सिफारिश काम आई। दूसरे महानगर उपाध्यक्ष अमित शर्मा बसपा नेता रहे शिवशंकर शर्मा के बेटे बताए जाते हैँ। जमानत जब्त, मगर, भाजपा महामंत्री
सूत्रों की मानें तो पार्षद का चुनाव लड़े एक भाजपा नेता की जमानत तक नहीं बची, लेकिन महानगर कार्यकारिणी में वह महामंत्री बन गए। यह स्थिति तब है, जबकि उनके चुनाव वाले इलाके में भाजपा का बेस वोटर अधिक है।
कुछ महानगर मंत्री नए चेहरे
विधायक के नजदीकी नेता भी महानगर मंत्री बन गए। पूर्व महानगर मंत्री रहे प्रवेश वर्मा और शिशुपाल कठेरिया की छुट्टी कर दी गई है। अरुण कश्यप, सुशील सक्सेना, नीलम जेठा, राजीव साहनी, अनुराधा खंडेलवाल, डा. तृप्ति गुप्ता अपना पद बचाने में कामयाब रहीं। नए पदाधिकारियों में संजीव शर्मा और अधीर सक्सेना महानगर मंत्री बने हैं। मनोज यादव मीडिया प्रभारी और प्रदीप रोहेला कार्यालय मंत्री इस बार भी बन गए हैं। अजय रत्नाकर सह कार्यालय मंत्री बन गए। यह नया पद सृजित किया गया है।
दलित पिछड़े और महिलाएं उपेक्षित
महानगर कार्यकारिणी में दलितों की उपेक्षा हुई है। 30 साल पुराने कार्यकर्ताओं को कार्यकारिणी में जगह नहीं मिली। अनुसूचित जाति में धोबी समाज के छोटेलाल उपाध्यक्ष बन पाए। बाकी में एक भी दलित नहीं है, जबकि पार्टी दलितों को हर स्तर पर जोड़ रही है। पार्टी संविधान में 33 फीसदी पद महिलाओं को मिलने चाहिए। 24 सदस्यीय कार्यकारिणी में आठ महिलाएं होनी चाहिए। मगर, केवल तीन हैं। वह भी पुरानी जमीं जमाईं। पूर्व पार्षद रुपेंद्र पटेल ने आरोप लगाया कि कुर्मी समाज से एक भी व्यक्ति कार्यकारिणी में नहीं रखा गया।
कोट--
महानगर कार्यकारिणी में सबको समायोजित किया गया है। फिर भी कुछ कार्यकर्ता रह गए हैं। उनके लिए तीन या चार नए पद सृजित कराने की बात चल रही है। हम उनको भी समायोजित करेंगे। डा. केएम अरोड़ महानगर भाजपा