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अब 25 गांवों की अश्व प्रजाति का लिया जाएगा सीरम सैंपल
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ग्लैंडर फारसी से पीड़ित घोड़ों को मारने के बाद लिया फैसला
पांच किमी के गांव में सौ फीसदी, दस किमी तक 50 फीसदी लेंगे सैंपल
अमर उजाला ब्यूरो
मुजरिया (बदायूं)। ग्लैंडर फारसी रोग से पीड़ित घोड़ों को मारने के बाद बीमारी की विभीषिका रोकने के लिए पशुपालन विभाग जोरशोर से जुट गया है। गांव कोल्हाई के आसपास के करीब 25 गांवों में सौ फीसदी अश्व प्रजाति के पशुओं के सैंपल लिए जाएंगे, जबकि दस किलोमीटर की रेंज में आने वाले गांवों में करीब 50 फीसदी पशुओं का सैंपल लेकर जांच को भेजा जाएगा।
शुक्रवार को गांव कोल्हाई (थाना मुजरिया) के दो घोड़ों को पशुपालन विभाग और ब्रुक इंडिया की टीम ने जहर देकर मारा और गहराई में दफना दिया था। इनके समेत तीन घोड़ों का दो माह पहले सैंपल लेकर हिसार (हरियाणा) की लैब में भेजा गया था। इसमें ग्लैंडर फारसी की पुष्टि होने पर यह कार्रवाई की गई। इससे पहले एक घोड़े को राजस्थान में मारा गया। उसका मालिक यहां से अपना घोड़ा लेकर वहां भट्ठे पर मजदूरी करने चला गया था। चीफ वेटनरी आफीसर (सीवीओ) डा. अरुण कुमार जादौन ने बताया कि डीएम से अनुमति मांगी गई है। विभाग एहतियात के तौर पर एक सघन सीरम सैंपल अभियान चलाएगा। डिप्टी सीवीओ सहसवान डा. एके सिंह की चयनित टीम कोल्हाई के चारों ओर स्थित पांच किमी दूरी तक के गांवों में जाकर सभी घोड़ों, गधों के सीरम सैंपल लेकर जांच को भेजेगी। पांच किमी से लेकर दस किलोमीटर की दूरी तक 50 फीसदी अश्व प्रजाति के पशुओं के सीरम सैंपल की जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल क्षेत्र के बाकी पशु स्वस्थ हैं और घबराने की कोई बात नहीं है। पशुओं को भविष्य के नुकसान से बचाने के लिए कवायद की जा रही है। इसलिए सभी पशु स्वामी खुद ही अपने पशुओं का सैंपल करवा दें। कोई अश्व स्वामी सैंपल देने से इंकार करता है, तब पुलिस के सहयोग से लेना पड़ेगा।
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इन गांवोें के सभी पशुओं का लेंगे सैंपल
पांच किलोमीटर की परिधि में आने वाले गांव कोल्हाई, सगराय, मुजरिया, जिजाहट, ढकपुरा, अलीगंज, सैमरा, सराय रामदास, पातरचोहा, मेमडी, बिहारीपुर, ज्वालापुर, खंदक, मुडसान, नगला हरि, दरियापुर, हसुआ नगला, सराय मनसुख, छगनपुर, असौली, रम्पुरा, मुडिया, रेलयी समसपुर, सिरकी, खेडा, लहरा और शेखानगला आदि हैं। यहां सभी पशुओं का सैंपल लिया जाएगा।
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पशुओं का कराएं बीमा
पशुपालन विभाग ने घोड़े और गधों को बीमित करने का भी लक्ष्य बनाया है। विभाग के मुताबिक यदि किसी घोड़े या गधे की कीमत चालीस हजार रुपये है तब पशु स्वामी 300 रुपये की वार्षिक किश्त देकर एक वर्ष तक का पशु बीमा करा सकते हैं। बाकी किश्त का 900 रुपया सरकार कंपनी को देगी। पशु की मृत्यु से लेकर अपंग होने तक पूरा मुआवजा उसे दिया जाएगा।
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पशु मालिकों की भी होगी स्वास्थ्य जांच
मारे गए घोड़ों के मालिकों और उनके परिवार के लोगों की भी जांच होगी। सीएमओ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम इनके रक्त नमूने लेकर जांच कराएगी कि इनके शरीर में तो किसी तरह का संक्रमण नहीं है। सीवीओ ने इस बारे में सीएमओ को रिपोर्ट भेज दी है।
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सीवीओ डॉ. जादौन ने बताया कि ग्लैंडर और फारसी दो अलग बीमारी हैं जो मुगल और अंग्रेजी शासन काल में भी अश्व प्रजाति के पशुओं में पाई जाती थीं। अंग्रेजों ने 1899 में ग्लैंडर एंड फारसी एक्ट बनाकर बीमारी के बचाव का बंदोबस्त किया था। बताया कि यह बैक्टीरिया जनित रोग है जो एक से दूसरे शरीर में प्रसारित हो जाता है। ग्लैंडर फेफड़े से होने वाली बीमारी है। इसमें फेफड़ों में इंफेक्शन और गांठें पड़ जाती हैं। इससे पीला पस भी आता है। वहीं फारसी त्वचा संबंधी रोगों से जुड़ा रोग है। इसमें पशु की त्वचा पर कहीं भी गांठें पड़ जाती हैं। यह फूटती हैं और इनसे पस आता है। ग्लैंडर फारसी रोग बरकोल्डेरिया मोवियाई नाम के बैक्टेरिया से फैलता है। मालिक अगर पशुओं के ज्यादा संपर्क में रहता है तो उसे भी यह रोग हो जाता है। यह रोग लाइलाज है। इलाज काफी महंगा है और उसमें भी बचने की कोई गारंटी नहीं है। रोग से बचाव की आज तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है। इसी वजह से सरकार का आदेश है कि सैंपल पॉजिटिव आने पर पशुओं को मारकर दबा दिया जाए।
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