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खेलकूद सामग्री के नाम पर 1.84 करोड़ का ‘खेल’

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बरेली। विज्ञान किट के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग में खेलकूद सामग्री के नाम पर 1.84 करोड़ रुपये का बंदरबांट शुरू हो गया है। इस सामग्री की खरीदारी प्रधानाध्यापक और कमेटी द्वारा की जानी है। मगर शिक्षकों का आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी अपने चहेते से सामग्री स्कूलों में भिजवाकर इस राशि का चेक देने का दबाव बना रहे हैं।
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बेसिक शिक्षा विभाग में सत्र खत्म होने वाला है और वार्षिक परीक्षाएं भी शुरू हो गई हैं। मगर बजट खपाने के लिए पिछले दिनों बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों में खेल सामग्री खरीदने का आदेश जारी कर दिया। प्राथमिक स्कूल के लिए पांच हजार और उच्च प्राथमिक स्कूल के लिए दस हजार रुपये की दर से एक करोड़ 84 लाख 30 हजार रुपये का भारी भरकम बजट भी जारी कर दिया। यह खरीदारी जिले भर के 2098 प्राथमिक एवं 794 उच्च प्राथमिक स्कूलों में की जानी है। मगर इसके बंदरबांट को लेकर विवाद शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार शर्मा द्वारा सीडीओ को दी गई शिकायत में कहा गया है कि स्पोर्ट्स किट को खरीदने की जिम्मेदारी विद्यालय स्तर पर गठित पांच सदस्यीय कमेटी की है। मगर खंड शिक्षा अधिकारियों ने स्पोर्ट्स किट अपने स्तर पर मंगवाकर स्कूलों पर थोपी जा रही हैं और मौखिक आदेश के जरिए प्रधानाध्यापकों पर उसकी राशि का चेक देने का दबाव बनाया जा रहा है। शिक्षक संघ का कहना है कि विज्ञान किट की तरह स्पोर्ट्स किट भी बजट खपाने का सौदा साबित होंगी।

व्यायाम शिक्षकाें की तैनाती पर भी विवाद
खेल सामग्री का बजट जारी होने के बाद विभाग ने जिले में आनन-फानन में एक जिला व्यायाम शिक्षक और 16 ब्लॉक व्यायाम शिक्षक भी बना दिए हैं। इसको लेकर यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह का आरोप है कि जिला स्काउट-गाइड कैप्टन ने योग्यता और अनुभव को दरकिनार कर अपने चहेते को व्यायाम शिक्षक की जिम्मेदारी दे दी है। उन्होंने इस संबंध में डीएम, सीडीओ और बीएसए से शिकायत की है।
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विज्ञान किट में भी हो चुकी है धांधली
वर्ष 2017 में विज्ञान किट को लेकर भी काफी विवाद मचा था। जूनियर स्कूलों में विज्ञान के प्रति छात्र-छात्राओं को जागरूक करने के लिए 60 लाख रुपये से ज्यादा का बजट शासन से मिला था। मगर विज्ञान किट के नाम पर जो उपकरण खरीदे गए, उनकी गुणवत्ता सवालों के घेरे में आ गई। काफी आरोप-प्रत्यारोप भी लगे लेकिन मामला रफा-दफा कर दिया गया। बाद में यह विज्ञान किट अनदेखी के चलते बर्बाद हो गईं।
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फैक्ट फाइल
कुल बजट : 1,84,30,000 रुपये
प्राथमिक स्कूल : 2098
उच्च प्राथमिक : 794
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