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मेनका के विरोध की पटकथा का पटाक्षेप

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पीलीभीत। सांसद मेनका गांधी और वरुण गांधी के खिलाफ चार भाजपा विधायकों और कुछ पार्टी पदाधिकारियों की ओर से की गई बगावत का आखिर पटाक्षेप हो गया। पार्टी हाईकमान ने बगावती तेवर दिखाने वाले सभी नेताओं को दिल्ली तलब कर डराया भी और मना भी लिया। पार्टी जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के मुताबिक अब सारे गिले-शिकवे भी दूर हो गए हैं।
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शहर के एक बरात घर में रविवार को भाजपा के बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा, बरखेड़ा विधायक किशनलाल राजपूत, बहेड़ी विधायक छत्रपाल गंगवार, सदर विधायक संजय गंगवार के प्रतिनिधि विजय गंगवार, पूर्व राज्यमंत्री डॉ. विनोद तिवारी और ब्रज प्रांत के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सुरेश गंगवार ने प्रेस कांफ्रेस की थी। सभी ने मेनका गांधी और वरुण गांधी के खिलाफ बगावती तेवर दिखाते हुए स्थानीय प्रत्याशी का मुद्दा उठाया था। इस दौरान तीन दशक से जिले की सांसद मेनका गांधी पर विकास कार्य न करने के भी आरोप लगाए थे। सीधे तौर पर मेनका और वरुण के खिलाफ बगावत का एलान कर दिया था।
इसे अनुशासनहीनता बताते हुए जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता ने रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को भेज दी थी। हाईकमान से फटकार के बाद बगावती तेवर दूसरे ही दिन ठंडे पड़ने लगेे थे। तीन नेताओं को छोड़ सभी को बैकफुट पर आने में देर नहीं लगी थी। इसके बाद मंगलवार को हाईकमान ने प्रकरण से जुड़े सभी नेताओं को दिल्ली तलब कर लिया। वहां घंटों बातचीत चली। सूत्र बताते हैं कि इस दौरान मेनका गांधी को भी बुलाया गया था। चुनाव से पहले भाजपा विधायक और पदाधिकारियों की ओर से उठाए गए स्थानीय प्रत्याशी के मुद्दे से जिले की सियासत भी गर्मा गई थी। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों पर प्रकरण चर्चा का विषय बन गया था। जिम्मेदार अब इसके शांत होने का दावा कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता का कहना है कि हाईकमान ने सभी को बुलाकर दिल्ली में बातचीत की है। जो भी कहना-सुनना था, हो गया है। अब कोई मुद्दा नहीं रह गया है। हालांकि इसे लेकर हाईकमान से उन्हें कोई दिशानिर्देश नहीं मिले हैं।
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