बरेली। पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर के निजी सचिव रहे मुनीश शर्मा ने मेयर उमेश गौतम के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करके उनको बर्खास्त करने की मांग की है। इस पर पलटवार करते हुए मेयर उमेश गौतम ने मुनीश शर्मा से जुड़ी फर्म आदित्य इंजकॉन के 70 लाख रुपये के निर्माण कार्यों के भुगतान पर रोक लगा दी है। साथ ही इन सभी कामों की गुणवत्ता के जांच के आदेश दिए हैं।
मेयर उमेश गौतम और पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर में लंबे समय से विवाद छिड़ा हुआ है। इसको लेकर सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट में भी मामले विचाराधीन हैं। पिछले दिनों डॉ. आईएस तोमर के निजी सचिव रहे मुनीश शर्मा, पूर्व पार्षद राजेश तिवारी और भाजपा पार्षद विपुल लाला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें सॉलिड वेस्ट प्लांट की जमीन पर मेयर का कब्जा बताते हुए उन्हें बर्खास्त करने की मांग की। इस मामले में सुनवाई के लिए पांच मार्च की तारीख लगी है।
इसी बीच सोमवार को मेयर के समक्ष आदित्य इंजकॉन के 70 लाख रुपये के सात निर्माण कार्यों के भुगतान के लिए आवेदन पहुंचा। यह निर्माण कार्य करीब ढाई साल पहले कराए गए थे लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ था। इस पर मेयर उन कामों की फाइल तलब कर ली तो सामने आया कि पूर्व मेयर डॉ. तोमर के निजी सचिव मुनीश शर्मा इस फर्म के कामों की देखरेख कर रहे थे। उनके नाम के तमाम दस्तावेज भी फाइल में लगे हुए हैं। मगर तत्कालीन नगर आयुक्त शीलधर यादव के समय में भी इन निर्माण कार्यों के भुगतान नहीं किए गए थे। इस पर मेयर उमेश गौतम ने निर्माण विभाग के अफसरों को सभी कामों की स्थलीय जांच करके रिपोर्ट देने को कहा है।
करीब ढाई साल पहले निर्माण कार्य किए गए थे। तत्कालीन नगर आयुक्त ने भी भुगतान नहीं कराया। इसके चलते भुगतान पर रोक लगाते हुए भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इस फर्म या मुनीश शर्मा द्वारा कराए गए अन्य कार्यों की जांच के भी निर्देश दिए गए हैं। - उमेश गौतम, मेयर
मेरे कार्यकाल के विकास कार्यों का भुगतान क्यों नहीं हुआ मैं नहीं बता सकता क्योंकि मेयर का इनसे कोई लेना देना नहीं होता है। अगर काम नहीं कराए गए हैं तो बिल्कुल भी भुगतान नहीं होना चाहिए। अगर यह बदले की भावना से की गई कार्रवाई है तो गलत है। - डॉ. आईएस तोमर, पूर्व मेयर
आदित्य इंजकॉन फर्म से मेरा कोई लेना देना नहीं है। यह मनीष अग्रवाल की फर्म है। कुछ समय के लिए मुझे पॉवर ऑफ अटार्नी दी थी लेकिन फिर वह खत्म भी हो गई। मेरे नाम के दस्तावेज फाइल में कहां से आए, मैं कुछ नहीं कह सकता। - मुनीश शर्मा
आदित्य इंजकॉन मेरी फर्म है। मुनीश शर्मा के साथ मैंने 2005-12 तक काम किया है। मगर यह काम वर्ष 2015-16 के हैं और इस दौरान हम लोगों ने अपना काम अलग कर लिया था। इन कामों से उनका कोई लेना-देना नहीं है। - मनीष अग्रवाल, प्रोपराइटर आदित्य इंजकॉन