फसल ऋण मोचन योजना
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25 हजार किसानों की शिकायत: लेखपालों ने लगा दी फर्जी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। लेखपालों की फर्जी रिपोर्ट से करीब 25 हजार किसानों का ऋण मोचन ‘संकट’ में है। ऋण माफी के लिए लेखपालों ने इनकी जमीन के रिकार्ड गलत दर्शा दिए हैं। इससे वे इस योजना से बाहर हो गए हैं। कृषि विभाग ने ऐसे मामलों की राजस्व विभाग से जब दोबारा जांच कराई तो पहले अपात्र बताए गए किसान अब बड़ी तादाद में पात्र मिल रहे हैं। इससे लेखपाल सहित राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है।
ऋण मोचन योजना में दो हेक्टेयर से कम जमीन वाले किसानों के 31 मार्च, 2016 तक लिए गए कर्ज में से एक लाख रुपये तक का लोन माफ होना है। कृषि विभाग में इसके लिए 1.48 लाख किसानों ने कर्ज माफी का दावा किया लेकिन डीएम की अध्यक्षता में बनी जिला स्तरीय कमेटी (डीएलसी) ने जांच में 66987 किसानों को ही पात्र घोषित किया और दिसबंर तक कर्ज माफी का फायदा भी इन्हीं को दिया गया। बाकी 81 हजार से ज्यादा फार्म अपात्र घोषित कर दिए गए। इसके बाद कृषि विभाग के कार्यालय में ऋण माफी से बाहर हुए किसानों की हजारों एप्लीकेशन का अंबार लग गया। इसमें किसानों ने यह शिकायत की कि लेखपालों ने उनकी जमीन के रिकार्ड गलत दर्शाए हैं। इस पर डीएलसी के आदेश पर किसानों की करीब 25 हजार शिकायतों को कृषि विभाग ने पांचों तहसीलों में भेजकर उनकी दोबारा जांच शुरू कराई। हैरानी वाली बात यह है कि पहले लेखपालों की पूर्व की जांच रिपोर्ट फर्जी निकल रही है। इसके बाद अब तक करीब 900 मामलों में पहले अपात्र बताए गए किसानों को अब पात्र घोषित किया जा रहा है। जबकि अभी तहसीलों से 20 हजार से ज्यादा मामलों की जांच आनी बाकी है।
ऋण माफी में किसानों से ज्यादा राजस्व कर्मियों की चांदी
ऋण मोचन में जमीन का रिकार्ड लगाने के नाम पर लेखपाल सहित राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारियों ने गरीब किसानों से खूब वसूली की। बताते हैं कि इसके लिए किसानों से एक से पांच हजार रुपये तक डिमांड की गई। सवाल एक लाख की कर्जमाफी का था, इसलिए किसान मजबूरी में सुविधा शुल्क देकर खामोश हो गए। सूत्र बताते हैं कि ऋण माफी में राजस्व कर्मियों ने मोटी कमाई की।
केस नंबर-1
सदर तहसील के गांव खजुआ जागीर निवासी राजेंद्र और छोटेलाल की जमीन दो हेक्टयर से ज्यादा दर्शा कर उनकी ऋणमाफी नहीं की गई। 15 दिसंबर को उन्होंने इसकी शिकायत कृषि विभाग में की। लेखपाल महेंद्रपाल ने दोबारा जांच में रिपोर्ट बदल दी और उनकी जमीन दो हेक्टेयर से काफी कम यानी 0.223 हेक्टेयर ही मिली।
केस नंबर-2
आंवला तहसील के गांव गणेशपुर निवासी लेखराज की भूमि के ब्योरे में भी लेखपाल ने दो हेक्टेयर से ज्यादा भूमि दर्ज कर दी। किसान ने शिकायत में यह भी बताया कि उसने दो मई, 2011 को बैंक ऑफ बड़ौदा से एक लाख से ज्यादा का ऋण भी लिया है। इसके बावजूद उनकी ऋण माफी नहीं हुई। दोबारा जांच में उनकी जमीन सिर्फ 1.510 हेक्टेयर ही मिली।
केस नंबर-3
बहेड़ी के गांव रोहिली के सोमपाल की शिकायत पर एसडीएम ने दोबारा जांच कराई, इसमें किसान की जमीन दो के बजाय 0.607 हेक्टेयर ही मिली। उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक की देवरनिया शाखा से मार्च, 2016 से पहले कर्ज लिया था।
वर्जन
कर्ज माफी को लेकर यह गंभीर मामला है। इस लापरवाही के लिए सभी पांचों तहसील के एसडीएम से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। दोषी लेखपालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - सत्येंद्र कुमार, सीडीओ