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सोमवार को सर्वपितृ अमावास्या का संयोग दिलाएगा पितृदोष से मुक्ति

Sat, 22 Sep 2018 12:07 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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 पितृों को शांत करने और पितृदोष से मुक्ति दिलाने वाला पितृपक्ष 24 सितंबर से शुरू होगा। इसका समापन आठ अक्तूूबर को होगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक आठ अक्तूबर को अमावस्या तिथि दिन में 11:33 बजे से जाएगी, इसलिए सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध कर्म आठ अक्तूबर को होगा। संयोग से इस दिन सोमवार है, जो पितृ दोष शांति के लिए विशेष माना जाता है।
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ज्योतिषाचार्य पं. मुकेश मिश्र ने बताया कि हिंदू धर्म में अंत्येष्टि के बाद संतान को भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक पूरा पखवाड़ा श्राद्ध कर्म करने का विधान है। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के इस पर्व को श्राद्ध कहते हैं। अबकी बार त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध सात अक्तूबर को होगा, क्योंकि इस दिन त्रयोदशी तिथि दोपहर में 2:04 बजे तक है। उसके बाद चतुर्दशी तिथि आरंभ हो जाएगी। पितरों का श्राद्ध दोपहर 12 बजे के बाद ही किया जाना श्रेयस्कर होता है।

पितृदोष निवारण का महत्व
शास्त्रों के अनुसार अगर विधि अनुसार पितरों का तर्पण न हो तो आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जो जातक सफलता के नजदीक पहुंचकर भी सफलता से वंचित होता हो, संतान उत्पत्ति में परेशानियां आएं, लगातार धन हानि हो, जन्मकुंडली के नवम भाव का स्वामी राहु या केतु से ग्रसित है तो यह पितृदोष कहलाता है। इससे मुक्ति के लिए पितरों को शांत किया जाता है।
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कब करें पूर्वजों का श्राद्ध
जिस पूर्वज, पितर या परिवार के मृत सदस्य के परलोक गमन की तिथि याद हो तो पितृपक्ष में पड़ने वाली उस तिथि को ही उनका श्राद्ध करना चाहिए। देहावसान की तिथि याद न हो तो सर्वपितृ अमावस्या (आश्विन अमावस्या) को श्राद्ध कर सकते हैं। अगर परिजन की अकाल मृत्यु हुई हो तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को करते हैं।
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