कैबिनेट में निर्णय होने के बाद सेना ने अपने डेयरी फार्म बंद करना शुरू कर दिए हैं। बरेली में लाल फाटक स्थित डेयरी फार्म भी जुलाई तक बंद करने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि यहां की गाय नीलामी में नहीं बेेची जाएंगी, क्योंकि ऐसे में उनका वध होने की आशंका रहती है। इसलिए इन पशुओं को प्रदेश सरकार से जुड़ी समितियों को बेचा जाएगा, जिसको लेकर तैयारियां चल रही हैं।
बता दें कि पिछले साल जुलाई में कैबिनेट का निर्णय होने के बाद सरकार ने देश भर में स्थित सेना के सभी 39 डेयरी फार्म बंद करने के आदेश दिए थे। कैबिनेट कमेटी ने सेना को आदेश जारी कर इन्हें तीन महीने में ही बंद करने को कहा था। इसके बाद इन्हें बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। पिछले दिनों उत्तराखंड के रानीखेत स्थित डेयरी फार्म को बंद करके वहां के पशु बरेली स्थित फार्म में भेज दिए गए। सूत्रों का कहना है कि अब इस फार्म को भी बंद करने की तैयारी चल रही है। जुलाई तक इस काम के पूरे होने की संभावना है। साथ ही काम करने वाले करीब सौ मजदूर भी काम से हटा दिए जाएंगे।
नीलाम नहीं होंगे पशु
सैन्य सूत्रों के मुताबिक बरेली के सैन्य फार्म में करीब 650 गाय हैं, इनमें से कुछ दुर्लभ मानी जाने वाली फ्रीजवाल प्रजाति की भी हैं। इसके अलावा साहीवाल समेत कई नस्लों की गाय हैं। सेना इन गायों को नीलाम नहीं करेगी क्योंकि नीलामी में हर तरह के लोग शामिल हो जाते हैं। संभव है कि मांस कारोबारी ही इन्हें खरीद लें। इसलिए इन पशुओं को सरकार से जुड़ी सहकारी समितियों को ही बेचा जाएगा।
बाहर का दूध पीयेंगे जवान
डेयरी फार्म में उत्पादित दूध सेना के जवानों और अफसरों को ही मिलता है। इसकी बिक्री खुले बाजार में नहीं होती। ऐसा माना जा रहा है कि डेयरी फार्म बंद होने के बाद सेना पूरी तरह से बाजार के पैकेटबंद या खुले दूध पर निर्भर हो जाएगी।
रक्षा संपदा विभाग को मिलेगी जमीन
बरेली का डेयरी फार्म करीब 740 एकड़ में फैला हुआ है। यहां के पशुओं का निस्तारण करने के बाद, डेयरी फार्म को बंद कर यह जमीन रक्षा संपदा विभाग को सौंप दी जाएगी। काफी दिन पहले ही इसको लेकर आदेश भी हो चुके हैं। - पीके सिंह, रक्षा संपदा अधिकारी