बरेली। बुधवार को मिशन शक्ति के जरिए प्रधानमंत्री ने दुनिया में भारत का परचम लहराया है। भारत ‘चौकीदारी’ करता है, यह इसका प्रमाण है। प्रधानमंत्री ने जो कर दिखाया, उससे खुशी होना लाजिमी है। अन्त:करण में अध्यात्म और विज्ञान के जरिए नये-नये लक्ष्य सिद्ध हो रहे हैं। मैं बहादुर प्रधानमंत्री, वैज्ञानिकों और राष्ट्रपति को बधाई देता हूं।’ भारत के अंतरिक्ष की महाशक्ति बनने पर संत मोरारी बापू ने अपने भाव कुछ इसी अंदाज में जाहिर किए। इसके बाद उन्होंने श्रद्धालुओं को ‘मानस अपराध’ कथा का रसपान भी कराया।
मोरारी बापू ने कहा, ‘ठाकुर हमारे रमण बिहारी, हम हैं रमण बिहारी के, साधू सेवा धर्म हमारा, काम न दुनियादारी से’, ‘कोई भला कहे, कोई बुरा कहे, हम हो गये रमण बिहारी के।’ इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने कहा कि उन्हें सत्ता से कोई लेना-देना नही हैं। लोकसभा का चुनाव जीत भी गए तो महज पांच साल ही टिकोगे, लेकिन व्यासपीठ का टिकट ले लिया तो परलोक तक साथ रहेगा। उन्होंने कहा कि अभी कई ऐसे धर्म हैं जो कच्चे हैं। पालने में झूल रहे हैं। दरअसल, उन्हें नहीं पता कि धर्म एक फल है, जिसका रस सेवा है। उन्होंने सेवा भाव को सबसे बड़ा धर्म बताया। बोले, पूजा करना अच्छा है, लेकिन सेवा करना उससे भी बढ़कर है। हर मनुष्य में ठाकुर जी का वास है, इसलिए कमजोर, असहाय, निर्बल और निर्धन मानवों की सेवा करना ही सच्ची सेवा है। ‘जमाने में ऐसे कई नादान होते हैं, जहां ले जाते हैं कश्ती, वहां तूफान होते हैं’ के माध्यम से बताया, कितना भी समझाओ कुछ लोग जानबूझकर गलत रास्ता पकड़ते हैं।
आय का दसवां भाग सेवा में लगाएं
मोरारी बापू ने कहा, मनुष्य के पास पैसा खूब है, लेकिन प्रेम का अभाव है। उन्होंने सुझाव दिया कि धन को बंदी न बनाओ। आय का दस प्रतिशत हिस्सा सेवा में लगाना चाहिए। उन्होंने मौजूद फैक्टरी मालिकों को कर्मचारियों को दोपहर का भोजन कराने का सुझाव दिया। कथा कराने, शादियों में कम खर्च करने, शौचालय बनवाने और रसोई बनवाने की सलाह दी।
ईश्वर को खुश करना आसान
बापू ने कहा, कलयुग में लोगों को खुश करने से ज्यादा आसान है ईश्वर को खुश करना। दूसरों से ईर्ष्या करने से मनोरोग होता है जो शरीर पर असर करता है। महिलाओं को दूसरों का रूप देखकर ईर्ष्या बोध से ग्रसित होने के प्रति सजग किया। दुर्योधन और द्रौपदी ने जो भी किया, ईर्ष्या वश ही किया। परिणामस्वरूप ‘महाभारत’ हो गई।
देश का अपराध कभी न हो
उन्होंने कहा कि जिस देश में रहते हो, उसके प्रति कभी अपराध नहीं करना चाहिए। इसके अलावा साधु-संत के प्रति अपराध करने के बजाय उनसे जीने की कला सीखने का प्रयास करना चाहिए। बापू ने बताया कि स्वभाव श्रीराम जैसा होना चाहिए, क्योंकि उनका स्वभाव दुश्मनों को भी प्यारा लगता है। श्रीराम नाम का जप आश्रित के अभिमान को खत्म कर देता है।
दीयों की रोशनी से जगमगाया धोपा मंदिर
बरेली। संत मोरारी बापू बृहस्पतिवार को कैंट स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर में आरती करने पहुंचे। उनके आगमन पर मंदिर परिसर स्थित सरोवर में दीपदान कार्यक्रम हुआ। शाम करीब छह बजे मंदिर प्रबंध कमेटी ने सरोवर को दीयों से सजाना शुरू कर दिया था। शाम करीब सात बजे मोरारी बापू मंदिर परिसर में पहुंचे। उनकी एक झलक पाने को श्रद्धालु बेकरार रहे। मोरारी बापू ने पहुंचते ही दीपदान की आरती उतारी और फिर धोपेश्वरनाथ का दर्शन-पूजन किया। उनसे पहले पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन और कत्था फैक्टरी के मालिक मोहता परिवार ने आरती उतारी। इस दौरान भक्तों ने सेल्फ ी और वीडियो बनाकर इन पलों को संजोने का प्रयास किया। बृहस्पतिवार शाम संत मोरारी बापू अशोका फोम परिवार और एक व्यवसायी के आवास पर भी कुछ देर ठहरे।
विद्यार्थियों से नैतिक गुणों पर चर्चा की
बरेली। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, संत मोरारी बापू राधा माधव पब्लिक स्कूल पहुंचे। उन्होंने विद्यालय स्थित मंदिर में शंख ध्वनि कर श्रीराधाकृष्ण को पुष्प अर्पित किए। विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और श्रीराम कथा के संदर्भ में शिक्षा, विनम्रता जैसे नैतिक गुणों को बढ़ाने पर चर्चा की। इस दौरान राधा माधव संकीर्तन मंडल के सदस्य, प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रेमशंकर अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरधर गोपाल खंडेलवाल, प्रबंधक राकेश कुंवर, जुगलकिशोर साबू, प्रधानाचार्य आरसी धस्माना आदि मौजूद रहे।