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सिंचाई विभाग में निलंबन के आदेश दबे, बस तबादले किए

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बरेली।
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कुछ दिन पहले सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने लीलौर झील घोटाले में एक्सईएन समेत सात अभियंताओं को निलंबित करने का आदेश दिया था। निलंबन का आदेश तो आया नहीं, अभियंताओं का तबादला करके कार्रवाई की इतिश्री कर दी गई। सिंचाई हेडवर्क्स शारदा नहर एक्सईएन दीपक यादव को बरेली से हटाने के आदेश हो गए। इन्हें लखनऊ में अनुसंधान एवं नियोजन खंड तीन से संबद्ध किया गया है। बाढ़ खंड में लंबे समय से तैनात एक्सईएन राकेश यादव को भी हटा दिया गया है। उनको अलीगढ़ सिंचाई निर्माण मंडल भेजा गया है। इन्हें शिवपाल यादव का करीबी माना जाता है।
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सिंचाई विभाग के सभी खंडों में बड़ी संख्या में अधिशासी अभियंताओं कोइधर से उधर किया गया है। इनमें सपा सरकार के दौरान मलाईदार पदों पर रहकर मोटी कमाई करने वाले एक्सईएन को भाजपा सरकार में अपेक्षाकृत महत्वहीन पदों पर भेजा गया है। हालांकि इनमें से किसी के निलंबन के आदेश नहीं हुए हैं। गोमती रिवर प्रोजेक्ट के अंतर्गत शारदा कैनाल की हरदोई ब्रांच में 14 करोड़ से ज्यादा के घपलों में विवादित माने जाने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के करीबी एक्सईएन दीपक यादव को बरेली शारा नहर हेडवर्क्स से हटाकर अनुसंधान एवं नियोजन खंड तीन लखनऊ में तैनाती दी गई है। उनके स्थान पर अलीगढ़ ड्रैनेज मंडल से शौर्यवर्धन को इसी पद पर बरेली भेजा गया है। उमेश कुमार को रुहेलखंड नहर एक्सईएन पद से हटाकर नियोजन एवं परियोजना खंड लखनऊ एक में तैनाती दी गई है। बरेली से दिलीप कुमार का प्रमोशन कर पीलीभीत भेजा गया है। लिलौर झील घोटाले में फंसे एक्सईएन रामबहादुर यादव को निलंबित करने के साथ ही लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। लिलौर झील घोटाले और हेडवर्क्स शारदा नहर खंड में हरदोई ब्रांच की सफाई मामलों में कई अन्य इंजीनियरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
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