बरेली। मानसून आने में 45 दिन बाकी हैं। नालों की सफाई अब तक शुरू नहीं हुई है। नगर निगम के निर्माण और स्वास्थ्य विभाग को शहर के कुल 236 नालों की सफाई करानी है। इसमें से 30 बड़े नालों की सफाई का टेंडर हो गया है, लेकिन विभाग की लेटलतीफी के चलते अब तक इसका वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया है। इसी कारण नालों की सफाई शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या बारिश शुरू होने से पहले नालों की सफाई पूरी हो पाएगी?
सुभाषनगर, सेटेलाइट, हजियापुर, सिकलापुर से होकर गुजरने वाले नाले सबसे बड़े हैं। 30 नालों की लंबाई भी 100 किमी से अधिक है। इन नालों की सफाई का टेंडर दो फर्माें ने करीब सवा दो करोड़ रुपये में लिया है। बड़ी दिक्कत तब शुरू होती है जब सिल्ट निकालकर नालों के किनारे छोड़ दी जाती है। उसी समय बारिश होने पर सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है। सिल्ट बहकर दोबारा नालों में पहुंच जाती है।
नगर निगम ने 150 किलोमीटर लंबाई में फैले 206 छोटे नालों की सफाई आउटसोर्स पर तैनात कर्मियों से करा रहा है। उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नैन सिंह ने बताया कि रविवार को हार्टमैन कॉलेज रोड पर मशीनों के माध्यम से नालों की सफाई हुई। आउटसोर्स पर लगे कर्मचारियों को मानसून से पहले नालों की सफाई पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।
शहर में नालों और नालियों पर हुए अतिक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अभियान शुरू किया है। इसके बावजूद कई जगह अतिक्रमण की वजह से नालियों की सफाई नहीं हो पा रही है। इसमें पुराने शहर के हजियापुर, सूफी टोला, कुरैश नगर जैसे इलाके शामिल हैं। यहां हर बार जलभराव होता है। सुभाषनगर में भी नालों और नालियाें पर अतिक्रमण है। यहां अब तक अभियान नहीं चलाया गया है। यहां भी हर बार जलभराव की स्थिति रहती है।
मानसून से पहले नालों की सफाई करा ली जाएगी। नालों के ऊपर से अतिक्रमण हटाया जा रहा है। अब इनकी सफाई के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त