यूपी उत्तराखंड के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर दो दशकों से चल रहा विवाद चरणबद्ध तरीके से निपटने लगा है। उत्तर प्रदेश ने दरियादिली दिखाते हुए उत्तराखंड को 37 नहरें दे दीं। इसमें मेरठ संगठन की 28, शारदा संगठन की पांच और चार नहरें नलकूप खंड से संचालित होती हैं। उत्तर प्रदेश ने प्रत्येक नहर का सौ मीटर का हिस्सा अपने पास रखा है। उत्तराखंड को दी गईं नहरों का कंट्रोल फिलहाल उत्तर प्रदेश से ही होगा। उत्तराखंड से आठ नहरें यूपी को मिलेंगी। इस पर अभी फैसला होना बाकी है। बाकी संपत्तियों के बंटवारे पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के बीच सोमवार को लखनऊ में बातचीत हुई।
नहरों के अलावा खेती की सिंचाई की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण समझे जाने वाले बनवसा बैराज से पानी आपूर्ति का पूरा कंट्रोल उत्तर प्रदेश के हाथ में है। उत्तराखंड इस बैराज पर अपना दावा कर रहा है। उत्तराखंड के टनकपुर और बनवसा में भी दोनों प्रदेशों की बहुत सी संपत्तियां हैं। इस पर विवाद उत्तराखंड के बंटवारे के समय से ही चला आ रहा है।
अब ये नहरें उत्तराखंड की होंगी
रुहेलखंड में शारदा संगठन से - प्राग नहर, देवरिया नहर, भंगा नहर, झनकट नहर, सडासडिया नहर।
उत्तराखंड के उद्यम सिंह नगर से- अंगदपुर नहर, उमरपुर नहर, धर्मपुर नहर और राजपुर नहर।
हरिद्वार की मेरठ गंगा संगठन से - जगजीतपुर नहर, कनखल नहर, नवीगेशन नहर, बहादराबाद नहर, अहमदपुर नहर, बहादराबाद द्वितीय नहर, पंचन छेड़ी नहर, चांदपुर नहर, सराय नहर, एकड नहर, इब्राहिमपुर नहर, अलीपुर नहर, रोहाल की नहर, मनोरथपुर नहर, दायीं खेलड़ी नहर, बांयी खेलड़ी नहर, गदरजुड्डा नहर, लखनौता नहर, तासीपुर नहर, टिकोला नहर, खेड़ा नहर, मंगलौर नहर, लिबरछेड़ी नहर, हरचंदपुर नहर, नसीरपुर नहर, ब्रह्मपुर नहर, दवाकी नहर, कांगड़ी नहर।