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कृषि विभाग का हाल- कहीं ठिकाने तो नहीं लग रही किसानों की सब्सिडी

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बरेली। बीज, खाद और कृषि यंत्रों में सब्सिडी को किसानों की पात्रता चिह्नित करने के लिए डिस्ट्रिक फार्मर एडवाइजर कमेटी बनी है। रबी और खरीफ सीजन में फसलों की बुवाई से पहले कमेटी के सदस्यों की बैठक होना जरूरी है क्योंकि उस बैठक में ही किसानों की पात्रता पर मुहर लगाई जाती है। मगर, किसानों की सब्सिडी को दलालों को बांटने के लिए कृषि विभाग के अफसर और कर्मचारी दो साल से बैठक नहीं करा रहे। बल्कि विभाग के बाबू और अफसर मनमाने तरीके से किसानों का चयन कर सब्सिडी अपात्रों को बांट रहे हैं। असली किसान सरकार की सब्सिडी से वंचित हो रहे हैं।
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मोदी सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने पर सबसे ज्यादा जोर दे रही है। कृषि विभाग लघु एवं सीमांत किसानों को आधुनिक और उन्नत खेती के लिए ब्लाक स्तरीय, जिला स्तरीय, प्रदेश स्तरीय, अंतर्राज्यीय प्रशिक्षण देने के लिए पात्रों का चयन आत्मा योजना में किया जाता है। इसके अलावा किसानों के लिए कृषि एक्सपो, क्षेत्रीय मेला प्रदर्शनी, सर्वोत्तम खेती करने पर 1.0 लाख तक का पुरस्कार देने, कृषि उपकरण खरीद में 80 से 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी, बीज और कीटनाशक में 50 फीसदी तक की सब्सिडी देने समेत तमाम योजनाएं संचालित की जाती हैं। इन योजनाओं में किसानों की पात्रता निर्धारित करने के लिए हर साल रबी और खरीफ सीजन (साल में दो) में बुवाई से पहले डिस्ट्रिक फार्मर एडवाइजर कमेटी (डीएफएसी) की मीटिंग होना अनिवार्य है क्योंकि इसमें ही चयनित किसानों की पात्रता पर मुहर लगती है। तब किसानों के खाते में सब्सिडी भेजी जाती है। बीते दो साल में डीएफएसी की एक बार भी न तो बैठक हुई, न ही सब्सिडी पाने वाले किसानों की पात्रता या अपात्रता पर कोई चर्चा। कृषि विभाग के बाबुओं ने मनमाने तरीके से सब्सिडी खातों में भेजने के लिए जिन किसानों की सूची तैयार कर दी। बिना बैठक बुलाए उसी सूची पर मुहर भी लग गई।
घूम फिरके चंद किसान हो रहे पुरस्कृत
इसमें कई कृषि यंत्रों की सब्सिडी के लिए एक ही परिवार के किसान चिह्नित कर लिए। विभाग के घाघ बाबू अपने चहेते चंद किसानों को धान, सरसों, मटर या लहसुन आधुनिक तरीके से पैदा करने के नाम पर कई बार पुरस्कार दिलाकर सम्मानित करा चुके हैं। पुरस्कार पाने वालों में हर साल ऐसे ही किसानों के नाम आगे करके सूची तैयार कर दी जाती है क्योंकि अफसर तो बदलते रहते हैं और बाबू उप निदेशक कार्यालय में 18 साल से सब्सिडी वाले पटल पर ही जमे हैं, जबकि इन बाबू की मूल तैनाती बहेड़ी में है। सब्सिडी में बंदरबांट कराने में माहिर बाबुओं को अफसरों का संरक्षण लगातार मिलता रहा है। बताया जाता है कि इन बाबुओं की पकड़ शासन तक में हो गई है।
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डिस्ट्रिक फार्मर एडवाइजर कमेटी (डीएफएसी) के सदस्य
जिलाधिकारी --- अध्यक्ष विशेषज्ञता और पता
सीडीओ--- उपाध्यक्ष
उप कृषि निदेशक --- सचिव
डा. वीपी सिंह-- सदस्य, आईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र
सिपाही लाल वर्मा-- सदस्य प्रगतिशील किसान गांव नगला जसी भुता
पूरन सिंह यादव सदस्य- गांव कुड्डा (पशुपालन) आलमपुर जाफराबाद
जंग बहादुर सिंह सदस्य-- गांव हरूनगला- (उद्यान खेती विशेषज्ञ)
राजवीर सिंह सदस्य- गांव सिसोना मझगवां (मत्स्य, रेशम उत्पादक किसान)
श्याम स्वरूप सदस्य- गांव गांव चिनेहटी बिथरी चैनपुर (अनुसूचित जाति किसान)
उर्मिला सदस्य गांव- लौंगपुर, फरीदपुर (महिला किसान)
राजेंद्र गुप्ता सदस्य ग्रीन पार्क एनजीओ संचालक (इनपुट सप्लायर)
संजीव अग्रवाल सदस्य प्रबंध निदेशक एवरग्रीन बायो फर्टिलाइजर सिविल लाइंस
सचिव
मंडी समिति सदस्य राजकीय सेवा
सामान्य प्रबंधक सदस्य राजकीय सेवा
जिला प्रबंधक सदस्य अग्रणी बैंक ऑफ बड़ौदा बरेली

डिस्ट्रिक फार्मर एडवाइजर कमेटी की लंबे समय से बैठक नहीं हुई। इस संबंध में उप कृषि निदेशक से बात करके बैठक की तारीख तय की जाएगी। किसानों को सब्सिडी देने में जो भी खामियां हैं, उनको ठीक कराया जाएगा। सत्येंद्र कुमार, सीडीओ
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