बरेली। बरामद खेप में कई नामचीन कंपनियों की दवाएं भी शामिल हैं। ये दवाएं वाकई उसी कंपनी में बनाई गई हैं या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए अधिकारियों ने 26 सैंपल सर्वे के लिए सनोफी, एबॉट व सिप्ला आदि कंपनियों को भेजे हैं। सहायक आयुक्त औषधि संदीप कुमार ने बताया कि शास्त्री मार्केट और गली नवाबान के 16 थोक विक्रेताओं ने आगरा से माल मंगाया है। औषधि निरीक्षकों ने इन सभी के प्रतिष्ठानों की जांच की है। संचालकों को नोटिस जारी कर दो साल में दवाओं की खरीद-बिक्री का ब्योरा जांच के लिए तलब किया है। बस अड्डों और ट्रांसपोर्ट केंद्रों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
सहायक आयुक्त ने बताया कि उन्हें संदेह है कि इन लोगों ने आगरा की बंसल मेडिकल एजेंसी, ताज मेडिको, एमएसवी मेडि प्वाइंट और मुजफ्फरनगर के विक्रेताओं से दवाएं खरीदी हैं। दवा कंपनियों और प्रयोगशाला से सैंपलों की जांच रिपोर्ट मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। शहर के ट्रांसपोर्टरों से आगरा-मुजफ्फरनगर भेजी जा रही दवाओं की जानकारी देने के लिए कहा गया है। औचक निरीक्षण में यदि किसी ट्रांसपोर्टर के यहां दवाओं की खेप मिली तो उसे भी पार्टी बनाकर कार्रवाई की जाएगी। औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने सूत्रों के जरिये बस अड्डों और ट्रांसपोर्टरों पर नजर रखें।
बरामद खेप में ये दवाएं हैं शामिल
औषधि निरीक्षक अनामिका जैन ने बताया कि बरामद दवाओं में गोवा की कंपनी सनोफी की एलेग्रा 120 एमजी की दो हजार से अधिक टेबलेट हैं। इसका बैच नंबर पांच-एनजी 001 है। यह दवा एलर्जी में काम आती है। एलेग्रा दवा पहले से ही जांच के घेरे में है। इसी तरह मुंबई की कंपनी एबॉट की यूडीलिव टेबलेट भी काफी मात्रा में मिली है। लिवर की बीमारी या पित्त की पथरी के इलाज में इसका इस्तेमाल होता है। इसी तरह सिप्ला समेत कई अन्य नामचीन कंपनियों की अटैरक्स, जैनुमेट, जालरा आदि दवाएं भी जखीरे में शामिल हैं।
संदेह के घेरे में दवाओं का क्यूआर कोड
सहायक आयुक्त ने बताया कि बरामद दवाओं के क्यूआर कोड जांचे गए हैं, लेकिन उससे कोई सही जानकारी नहीं मिली। प्रतीत हो रहा है कि बरामद दवाओं पर मौजूद क्यूआर कोड भी नकली हैं। सहायक आयुक्त औषधि संदीप कुमार भी स्वीकारते हैं कि दवा माफिया ने ब्रांडेड कंपनियों के सुरक्षा फीचर में सेंधमारी की है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से नकली क्यूआर कोड बनाए जाने की बात सामने आ रही है। आगरा में भी इसी तरह का खेल सामने आया है। विक्रेताओं ने एक ही बैच नंबर पर एंटी एलर्जिक, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, खांसी, एंटीबायोटिक समेत कई तरह की दवाएं बाजार में खपाई हैं।
बरेली में खपाई जा रहीं नकली दवाएं
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, पुड्डुचेरी और चेन्नई में नकली दवाएं बनाकर उन्हें प्रदेश के विभिन्न जिलों में खपाया जा रहा है। ट्रेन के जरिये लाकर इन दवाओं का भंडारण आगरा में किया जाता है। दवा माफिया वहां से आठ फर्मों के नाम पर कानपुर, लखनऊ, बरेली में दवाएं मंगवाते हैं। बरेली के कई थोक विक्रेता इस सिंडिकेट से जुड़कर दवाओं का काला कारोबार कर रहे हैं। संवाद