दोनों स्कूली वाहन मोड़ पर टकराए थे। पुलिस और प्रशासन अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में हादसे की मुख्य रूप से दो वजह सामने आई हैं। घटनास्थल पर जो मोड़ है, वहां आमने-सामने से आते वाहन दिखाई नहीं देते। मोड़ के अंदर साइड में सड़क किनारे काफी गहरा गड्ढा है। उसी गड्ढे के नीचे खाई है। अनुमान है कि जब बस गौंतरा की ओर से असधरमई गांव की ओर जा रही थी तब चालक को सड़क किनारे गड्ढा दिखाई दिया होगा।
चालक ने गड्ढे से वाहन को बचाने की कोशिश की तभी अचानक सामने से वैन आ गई। उसकी रफ्तार इतनी तेज थी कि चालक वैन को बस से बचा भी नहीं पाया। हालांकि वैन चालक की साइड में काफी जगह थी। अगर रफ्तार धीमी होती तो शायद वह आराम से वैन को वहां से निकाल सकता था। वहीं बस का थोड़ा ही पहिया गड्ढे में जाने से बच गया। अगर पहिया गड्ढे में चला जाता तो बस भी पलट जाती।
उस वक्त बस में चार-पांच छात्र-छात्राएं सवार थीं। यह बस अन्य बच्चों को लेने असधरमई की ओर जा रही थी। जबकि वैन आसपास के गांव से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। उसमें ही सबसे ज्यादा बच्चे बैठे थे। जबकि वैन सिर्फ सात सवारियों के लिए ही मान्य है।
हादसे की जांच को तीन सदस्यीय कमेटी गठित
जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें जिला राजस्व अधिकारी को अध्यक्ष, डीआईओएस और पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन को सदस्य बनाया गया है। उन्हें जांच के लिए सात दिन का समय दिया गया है। इस दौरान वह जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। डीएम मनोज कुमार ने बताया कि यह हादसा वास्तव में काफी गंभीर है। वैन में छोटे-छोटे बच्चे सवार थे। यह हादसा कैसे हुआ और इसके क्या कारण रहे, इसकी जांच होना जरूरी है। जिला राजस्व अधिकारी के निर्देशन में पूरी जांच संपन्न होगी। जांच में जो सच्चाई सामने आएगी। फिर उसके अनुसार कार्रवाई होगी।
फोरेंसिक टीम ने मौके पर जुटाए साक्ष्य
हादसे के बाद पुलिस की फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। इस टीम ने मौके से तमाम साक्ष्य जुटाए हैं। टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने सड़क की चौड़ाई कितनी थी। बस के पहिये कहां पर थे और वैन किस एंगल पर गौंतरा की ओर से आ रही थी, इन सभी बिंदुओं पर जांच की। सड़क पर बस के पहियों के रगड़ के निशान भी मिले हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि बस चालक ने वैन को देखकर ब्रेक भी लगाए थे लेकिन तब तक वैन और बस की भिड़ंत हो गई थी।