बरेली। कुछ समय पहले 75 पार के सांसदों को और मौका न दिए जाने की भाजपा हाईकमान की घोषणा ने बरेली सीट से केंद्रीय राज्यमंत्री संतोष गंगवार के टिकट पर सवाल खड़े किए थे, लेकिन लोकसभा चुनाव के एलान के साथ हाईकमान ने जब अपना फैसला वापस लेने का निर्णय लिया तभी साफ हो गया कि टिकट के मामले में संतोष गंगवार की चुनौतियां खत्म हो गई हैं। दरअसल संतोष गंगवार की सबसे बड़ी ताकत इस संसदीय क्षेत्र के उनके सजातीय कुर्मी मतदाता है, जिनके दम पर वह सात बार चुनाव जीत चुके हैं। कुल मिलाकर वह आठ चुनाव लड़े हैं, जिसमें से सिर्फ एक ही बार उन्हें मात मिली है। माना जा रहा है कि अगर पार्टी हाईकमान उनका विकल्प तलाश करने की कोशिश करता तब भी उसे कामयाबी मिलना मुश्किल था। लिहाजा पहली ही लिस्ट में उनका टिकट फाइनल हो गया। आंवला सीट से धर्मेंद्र कश्यप के टिकट को लेकर जरूर कुछ सस्पेंस बना हुआ था। सोशल मीडिया के साथ पार्टी के अंदर भी उनके टिकट को लेकर सवाल उठ रहे थे। दरअसल, यह स्थिति पार्टी संगठन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की रिपोर्ट से पैदा हुई थी। सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट में धर्मेंद्र कश्यप के कार्यकाल को बेहतर नहीं बताया गया था, लेकिन बात जब आंवला सीट पर जातिगत समीकरणों को देखते हुए बसपा और कांग्रेस के मुकाबले मजबूत उम्मीदवार तलाशने की आई तो धर्मेंद्र कश्यप के अलावा कोई चेहरा उपयुक्त नहीं माना गया। बता दें कि आंवला में कश्यप बिरादरी के वोट निर्णायक तादाद में हैं। धर्मेंद्र कश्यप का टिकट काटे जाने से इनके बंट जाने का खतरा था। जातिगत वोटों के गणित में कोई और फिट नहीं बैठा तो धर्मेंद्र कश्यप का टिकट फाइनल कर दिया गया।
चर्चा-ए-आम: जितिन भाजपा के प्रबंधकों के संपर्क में
मंडल के चुनावी माहौल में सबसे गर्म खबर कांग्रेस के दिग्गज नेता जितिन प्रसाद के भाजपा के संपर्क में होने की है। सूत्र बता रहे हैं कि रुहेलखंड के साथ अवध क्षेत्र में सवर्ण बिरादरी को खींचने के लिए भाजपा के चुनाव प्रबंधक जितिन प्रसाद के संपर्क में है। इससे जितिन के भाजपा में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। दरअसल सूत्रों का कहना है कि अचानक यह गणित इसलिए बदला है क्योंकि कांग्रेस जितिन प्रसाद को उनकी परंपरागत लोकसभा सीट धौरहरा के बजाय लखनऊ सीट से चुनाव लड़ाना चाहती है। बताया जाता है कि यह फरमान कांग्रेस हाईकमान के बड़े नेता की ओर से दिया गया है लेकिन जितिन इससे काफी नाराज बताए जा रहे हैं। कांग्रेस के दिग्गज उन्हें मनाने में लगे हैं, मगर इसके साथ भाजपा की ओर से उन्हें अपनी ओर खींचने की भी तेजी से कोशिशें हो रही हैं। शुक्रवार को पार्टी के अंदर से निकलकर यह चर्चा सोशल मीडिया पर भी फैल गई। यहां तक कहा गया कि जितिन प्रसाद दोपहर को ही भाजपा की दिल्ली में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन करने की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि यह कॉन्फ्रेंस राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ओर से क्रिकेटर गौतम गंभीर को शामिल करने की घोषणा के साथ खत्म हो गई। इसके बाद भी जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने पर सस्पेंस लगातार बना हुआ है। कहा जा रहा है कि अगर जितिन भाजपा में शामिल होते हैं तो भाजपा उन्हें धौरहरा सीट से चुनाव लड़ा सकती है। परंपरागत कांग्रेसी पृष्ठभूमि से आने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के भाजपा में जाने से शाहजहांपुर, लखीमपुर, धौरेहरा और सीतापुर ही नहीं बल्कि बरेली सीट पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है।
कांग्रेस के टिकट के लिए सर्वराज ने दिल्ली में डाला डेरा
सपा-बसपा गठबंधन में आंवला की सीट बसपा के खाते में चले जाने के बाद पूर्व सपा सांसद सर्वराज सिंह अपने लिए लगातार नए ठिकाने की तलाश में हैं। कुछ दिनों पहले उनके नीतीश कुमार से संपर्क करने की चर्चा थी, लेकिन अब सोशल मीडिया पर उनके कांग्रेस के टिकट पर आंवला से चुनाव लड़ने की चर्चा है। सर्वराज के नजदीकी लोगों में इससे कोई इंकार भी नहीं कर रहा है। उधर, सर्वराज सिंह लगातार दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। शुक्रवार को फोन पर उनसे बात हुई तो उन्होंने कहा कि वह शनिवार को अपनी रणनीति का खुलासा करेंगे, हालांकि उनके बेटे और आंवला से पिछली बार सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके सिद्धिराज सिंह का कहना था कि उनकी ओर से 27 मार्च को यह फाइनल किया जाएगा कि उनका अगला कदम क्या होगा। बहरहाल यह चर्चा जोरों पर है कि वह कांग्रेस में जल्द ही शामिल हो सकते हैं। हालांकि राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि आंवला सीट कांग्रेस ने बंटवारे में अपने सहयोगी महान दल को दे दी है। मगर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मेनका गांधी पर सस्पेंस बरकरार
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के पीलीभीत से चुनाव लड़ने पर भी सस्पेंस बरकरार है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार मेनका गांधी पीलीभीत से चुनाव लड़ेंगी या नहीं। इसका निर्णय खुद उन पर छोड़ा गया है। अगर मेनका गांधी हरियाणा या पंजाब की किसी लोकसभा से चुनाव लड़ती हैं तो अपने बेटे वरुण गांधी को पीलीभीत से चुनाव लड़ा सकती हैं। वरुण या मेनका में से कौन प्रत्याशी होगा, सबकी नजरें इसी पर टिकी हैं।
शाहजहांपुर में कृष्णा राज की जगह अरुण सागर, अब चेतराम संभालेंगे पासी वोट
शाहजहांपुर में पासी समाज का वोट बड़ी संख्या में है। इसलिए पिछली बार कृष्णाराज को टिकट दिया गया था। मगर, उनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर गहराते असंतोष को देखते हुए पार्टी ने अपने पुवायां के विधायक चेतराम पर अपने समाज साधने की जिम्मेदारी डालकर यहां बसपा में रहे अरुण सागर पर दांव लगाकर भाजपा ने उसके कैडर जाटव वोट में सेंध लगाने की योजना बनाई है। इससे पहले पार्टी दलितों में जाटव समुदाय को टिकट देने से कतराती रही है, मगर, इस बार पार्टी ने अपना पुराना मिथक तोड़ दिया है। दलितों में जाटव बिरादरी को पहली बार भाजपा ने प्राथमिकता दी है। उधर बदायूं से संघ मित्रा मौर्य को टिकट देकर पार्टी ने रुहेलखंड में मौर्य-शाक्य और कश्यप वोटों का (पांच लाख से अधिक) वोटों समीकरण साधने की कोशिश की है। बता दें कि सपा-बसपा गठबंधन के मुस्लिम, जाटव और यादव समेत अन्य पिछड़े ओर दलित वोट बैंक की काट के लिए पार्टी ने एक बार कुर्मी, कश्यप, शाक्य, मौर्य और लोध मतदाताओं के अलावा सवर्ण जातियों को साधने का प्रयास किया है।