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वार्ड परिक्रमा- कोहाड़ापीर- 100 से ज्यादा डेयरियों ने नर्क बनाकर रख दिया वार्ड

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वार्ड परिक्रमा- कोहाड़ापीर- 100 से ज्यादा डेयरियों ने नर्क बनाकर रख दिया वार्ड - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। कोहाड़ापीर वार्ड में घनी बस्ती है। सड़कें और गलियां अतिक्रमण की वजह से पहले से ही संकरी हैं। उस पर 100 से ज्यादा डेयरी मालिकों ने पूरा इलाका नर्क बनाकर रख दिया है। डेयरियों में पलने वाली गाय भैंसों का गोबर डेयरी मालिक नालियों में बहाते हैं। किसी भी गली में निकल जाइए। आपको उसमें गोबर जरूर मिलेगा। बारिश में गोबर से चोक नालियों से पानी घरों के अंदर कमर तक भर जाता है। जलभराव की वजह से इलाके में मच्छर पनपते हैं। बरसात में जलभराव और मच्छरजनित बीमारियां फैलने की वजह से यहां हालात बद से बदतर हो जाते हैं। अब तक नगर निगम ने इस समस्या के समाधान की पहल नहीं की है।
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निर्बाध जलनिकासी के लिए नगर निगम ने कोहाड़ापीर से सुर्खा बानखाना तक एक करोड़ की लागत से नाला बनाया है। उसमें कही भी पानी निकासी के लिए ढाल नहीं रखी गई है, जिसके चलते नालियों और घरों के पानी की निकासी नहीं हो पा रही। ठेकेदार ने यह नाला अधूरा छोड़ दिया है। पूरा नाला चोक है। गंदगी का आलम यह है कि सड़कों और गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं। पहले यहां 26 सफाई कर्मचारी थे। अब मात्र 16 ही रह गए हैं। तीन महिला सफाई कर्मचारी काम नहीं करतीं। दो पुरुष कर्मचारी दूसरी जगह अटैच होने की वजह से काम पर नहीं आ रहे। सीवर के मेनहोल खुले पड़े हैं, जिनसे कभी भी कोई हादसा हो सकता है। नगर निगम ने हाल ही में पुराना शौचालय और उसके बगल में बनी दुकानें तुड़वा दीं। अब इस सरकारी जमीन पर माफिया की नजर है। वह करोड़ों की जमीन पर कब्जा करने में लगे हैं। पुलिस के संरक्षण में यहां सट्टे का कारोबार पान के खोखे और दुकानों पर चलता है। रात में बाइकर्स गलियों में तेज रफ्तार से बाइक निकालते हैं। अगर उनको कोई टोक दे तो लड़ाई झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। बाइकर्स के आतंक की वजह से शाम होते ही महिलाएं घरों में कैद हो जाती हैं।

क्या कहते हैं बाशिंदे
डेयरी की गाय भैंसों का गोबर नाले नालियों में पड़ने से हालात बहुत खराब रहते हैं। गोबर से मच्छर पैदा होते हैं। गंदगी रहती है। डेयरियां शहर से बाहर शिफ्ट हो जाएं तो काफी हद तक गंदगी दूर हो जाएगी। -दिनेश कुमार सिंह, कोहाड़ापीर
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हर जगह गली और सड़कों पर कूड़े और गंदगी के ढेर लगे हैं। सफाई कर्मचारियों में बहुत से ड्यूटी पर नहीं आते। पानी निकासी का इंतजाम न होने से बारिश में गलियां तालाब बन जाती हैं। डेयरियों ने तो हालत और खराब कर दी है। -मोहसिन अहमद खान
नगर निगम ने एक करोड़ की लागत से नाला बनाया। वह ठेकेदार ने अधूरा छोड़ दिया। नाले में ढाल ही नहीं बनाई। उससे पानी की निकासी नहीं हो पा रही। सब पैसा बर्बाद हो गया। सफाई कर्मचारियों के ड्यूटी पर न आने से गंदगी और कूड़ा नियमित नहीं उठता। - शमीम अहमद, पार्षद
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