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बहुत जोर लगाया तब भी पिछला आंकड़ा पार न हो पाया

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बरेली। भाजपा के लिए चुनाव की हवा इस बार कुछ खास माफिक नहीं थी। सपा-बसपा के गठबंधन ने बरेली और आंवला दोनों सीटों पर और तमाम मुश्किल चुनौतियां खड़ी कर दी थीं, लेकिन आखिरकार भाजपा के चुनाव प्रबंधन और मोदी के जादू ने बाजी फिर पलट दी। मंगलवार को सुबह मतदान शुरू होने के बाद जैसे-जैसे मतदाताओं के रुझान की खबरें मिलती गईं, कई दिनों से तनाव में डूबे भाजपा नेताओं के चेहरे खिलते गए। मतदाताओं के भारी जोश दिखाने के बावजूद दोनों सीटों पर मोदी लहर में हुए पिछले चुनाव में हुए मतदान का आंकड़ा तो पार नहीं हो पाया लेकिन कई हिंदू बहुल इलाकों में पिछली बार से भी ज्यादा मतदान होने की खबरों ने साफ कर दिया कि चुनाव से तीन दिन पहले ही मोदी ने देवचरा की जनसभा में जो तीर चलाए थे, उनमें से ज्यादातर सही निशाने पर लगे हैं।
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सपा और बसपा के गठबंधन को भाजपा नेता शुरुआत से ही अपने चुनाव प्रचार में बेदम बताते हुए खारिज करने में तो जुटे हुए थे, लेकिन असल में उनके माथे के बल यह भी बता रहे थे कि इस गठबंधन ने उन्हें कितना तनाव में डाल रखा है। जातीय समीकरणों के आधार पर कागज पर वोटों का गणित बरेली और आंवला दोनों सीटों पर गठबंधन को उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित कर रहा था। चुनाव में स्थानीय मुद्दे तो इस बार उठे ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी पुलवामा अटैक के सर्जिकल स्ट्राइक, आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दों के अलावा मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा के पास ज्यादा कुछ नहीं था। भाजपा के स्थानीय नेताओं का चुनाव प्रचार भी मोदी पर ही केंद्रित था। मतदाताओं में भी ध्रुवीकरण का आधार मोदी बने हुए थे। ऐसे हालात में 20 अप्रैल को देवचरा के आर्मी कैंपिंग ग्राउंड पर हुई प्रधानमंत्री मोदी की जनसभा ने बरेली-आंवला दोनों प्रत्याशियों के अभियान में जान फूंक दी। इस जनसभा में मोदी का फोकस राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के साथ पिछड़े मतदाताओं पर रहा और मंगलवार को मतदान के रुझान ने स्पष्ट कर दिया कि उनके इन तीरों ने बखूबी काम किया है।
भाजपा नेताओं की एक सबसे बड़ी चिंता यह भी थी कि कहीं ऐसा न हो कि भाजपा का वोटर वोट डालने ही न निकले लेकिन यह आशंका भी दोपहर होते-होते छंट गई। दोनों सीटों पर मतदान पिछले चुनाव की अपेक्षा थोड़ा कम जरूर हुआ, लेकिन जिस तरह भाजपा का परंपरागत वोट माने जाने वाले हिंदू बहुल इलाकों में सुबह से ही वोटर वोट डालने निकले, उससे यह चिंता भी खत्म हो गई। फर्क बस इतना रहा कि सुबह मतदान काफी तेज गति से चला और उसके बाद धीमी गति से पूरे दिन चलता रहा। कुछ मतदान केंद्रों पर दोपहर के वक्त जरूर सन्नाटा दिखा, लेकिन ज्यादातर मतदान केंद्रों पर धीमी गति से ही सही, पूरे दिन वोट पड़ते रहे। वोटरों यह ट्रेंड पिछले चुनावों से कुछ अलग सा था। ईवीएम की खराबी और धूप की तेजी से भी कहीं-कहीं मतदान प्रभावित रहा।
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रामपुर बाग और राजेंद्र नगर में रिकॉर्ड वोटिंग का इतिहास
बरेली। लोकसभा चुनाव में मतदान के दौरान यह एक अलग तरह का नजारा था, जिसने इस धारणा को तोड़ दिया कि मुस्लिम मतदाता हिंदुओं के मुकाबले ज्यादा तेजी से वोटिंग करते हैं। इस बार रामपुर बाग और राजेंद्र नगर समेत कई ऐसे हिंदू बहुल पॉश इलाकों ने भी मतदान करने में बढ़त हासिल की जो अपनी सुस्त रफ्तार और न्यूनतम मतदान के लिए जाने जाते थे। दोनों इलाकों में चटक दोपहरी में भी मतदान केंद्रों पर लोग वोट डालते नजर आए। मुस्लिम बहुल मतदान केंद्रों पर भी सुबह मतदान तेज गति से हुआ लेकिन 11 से तीन बजे तक तमाम बूथों पर सन्नाटा भी पसरा दिखाई दिया।
मौलाना आजाद इंटर कॉलेज मतदान केंद्र पर दोपहर डेढ़ बजे तक लगभग 35 प्रतिशत ही से पड़े थे, ठीक इसी समय सिविल लाइंस और रामपुर गार्डन के बूथों पर 40 फीसदी से अधिक मतदान हो चुका था। इससे पहले रामपुर गार्डन में पूरे दिन में ही अधिकतम मतदान बमुश्किल 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच पाता था। इसी तरह राजेंद्र नगर और मॉडल टाउन जैसे इलाकों में भी पहली बार मतदान का आंकड़ा 50 फीसदी से पार पहुंचा।
पुराना शहर, किला, बिहारीपुर समेत अन्य इलाकों में भी दोपहर की गर्मी में मुस्लिम मतदाताओं के मतदान की रफ्तार भी काफी सुस्त दिखी। नवाबगंज में हिंदू बहुल जेपी इंटर कॉलेज में मतदान का प्रतिशत दोपहर तीन बजे तक 50 फीसदी से अधिक था, वहीं मुस्लिम बहुल मतदान केंद्र श्री कृष्णा इंटर कॉलेज में काफी कम वोट पड़े थे। तमाम मुस्लिम मतदाता शाम चार बजे तक यही माहौल भांपने में लगे दिखाई दिए कि किधर वोट डालना है। एक मतदाता ने नाम न छापने की गुजारिश पर बताया कि नगरपालिका के चुनाव में तो मुस्लिम समुदाय सुबह से ही लंबी लाइनें लगाकर वोट डाल देता है, लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाता पहले अन्य जगहों से माहौल भांपता है और संदेश आते हैं कि किधर जाना है, तब वोट डालने घर से निकलता है।


संतोष गंगवार के गांव में वोटर नाराज, वोट फिर भी भाजपा को
बरेली। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के गांव टियुलिया में लोग अच्छी सड़कें, टूटी फूटी गलियां और बिजली की व्यवस्था दुरुस्त न होने पर खासा नाराज दिखे। उनका कहना था कि मंत्री जी ने अपने ही गांव पर ध्यान नहीं दिया जबकि वह हर बार उनको ही वोट देते हैं। मोदी जी की वजह से इस बार भी वोट उनको ही दिया है।
शाम करीब साढ़े चार बजे टियुलिया में 2249 वोट में से 1502 वोट पड़ चुके थे। शाम तक यहां 70 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ। संतोष गंगवार की पत्नी सौभाग्यवती सुबह से ही बूथ पर मौजूद रही। उनका कहना था कि ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए गांव के लोगों को जागरूक किया है। गली में बैठी महिलाओं से जब बात की तो उनके तीखे बोल शुरू हो गए। लता, पूनम, मीना, उर्मिला ने कहा कि यह गांव कहने को मंत्री जी का अपना गांव है, लेकिन यहां गलियों का हाल आप देख ही रहे हो। बिजली भी दूसरे मोहल्ले से लाइन डालकर लानी पड़ रही है। घर में महमान आते हैं तो टोकते हैं। थोड़ी दूर आगे गोमती देवी, पार्वती, ओमवती समेत कई महिलाएं बोलीं कि बेटे-बेटियों की शादी होती है तो मेहमान मंत्री जी नाम लेकर टूटी गलियों पर तंज कसने से नहीं चूकते। बड़ी शर्मिंदगी होती है, लेकिन मंत्री जी गांव के हैं। मोदी जी का भी ख्याल है, इसलिए सबने वोट संतोष गंगवार को ही दिया है।
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