बरेली। विश्व क्षय रोग दिवस के उपलक्ष्य में 23 मार्च से चल रहे जागरूकता कार्यक्रमों के क्रम में बृहस्पतिवार को समापन पर आईएमए में पैनल डिस्कशन हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि करीब 27 प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जिनमें दवा का पूरा असर नहीं दिख रहा है। दरअसल, अधूरे और अनियमित इलाज से टीबी जीवाणु मारने में दवा बेअसर साबित हो रही है। उन्होंने नियमित समय पर दवा खाने और डॉक्टर के परामर्श पर ही कोर्स बंद करने का सुझाव दिया।
सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल ने बताया कि अब सीबी नाट के साथ ही, जांच के लिए भमौरा में टूनाट मशीन लगाई गई है। यह अत्याधुनिक उपकरण है। इससे टीबी रोग संबंधी जांच तेजी और आसानी से होती है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एसके गर्ग ने बताया कि अब लापता मरीजों को खोजने के लिए निजी चिकित्सकों और मेडिकल स्टोर संचालकों को नोटिफिकेशन जारी किया गया है। वे मरीजों को इलाज के लिए क्षय रोग केंद्र भेजेंगे या रजिस्ट्रेशन कराएंगे तो उन्हें पांच सौ रुपये प्रति मरीज मिलेंगेे। उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों को भी मरीज अपना गलत पता और मोबाइल नंबर दे रहे हैं, जिससे उनकी पहचान और इलाज पूरा नहीं हो पा रहा है।