जिला अस्पताल में उल्टी-दस्त के 240 मरीज पहुंचे, भर्ती किए गए 20 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। गर्मी की वजह से जिला अस्पताल में बुखार और उल्टी-दस्त के मरीजों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसमें से सोमवार को 20 मरीजों को भर्ती किया गया, जबकि अन्य मरीज दवा लेकर लौट गए। डॉक्टर मरीजों को गर्मी से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
सोमवार सुबह 8 बजे से 2 बजे तक जिला अस्पताल में 1354 लोगों ने पर्चा बनवाकर दवाइयां लीं। इसमें 240 मरीज उल्टी-दस्त के थे। डॉक्टरों ने सभी मरीजों को देखकर दवा दी। 20 मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज शुरू कर दिया गया है।
मई माह में, जो तापमान है, वह बीस साल में पहली बार उच्चतम पर पहुंचा है। मई माह में जून माह का भी रिकार्ड टूट गया है। गर्मी के चलते उल्टी-दस्त समेत अन्य बीमारियों के रोगियों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। दिन-प्रतिदिन बढ़ती गर्मी का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिख रहा है। जिला अस्पताल में आने वाले रोगियों की संख्या बढ़ गई है। इस समय गर्मी के चलते इन दिनों उल्टी-दस्त के रोगी बढ़े हैं।
जिला अस्पताल ही नहीं बल्कि जिले के 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा 43 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ निजी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। अस्पताल में डिहाइड्रेशन से लेकर उल्टी, सिरदर्द, तेज बुखार, पेट दर्द, डायरिया की परेशानी लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। गर्मी के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर आने वाले मरीजों की संख्या में 20 फीसदी की वृद्धि हुई है।
चिकित्सकों की मानें तो उच्च तापमान बढ़ जाने पर खाद्य पदार्थ जल्दी दूषित हो जाते हैं। वहीं, इस समय प्यास बुझाने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले ज्यादा शीतल पेय पदार्थों के कारण गले में संक्रमण हो जाता है। वहीं, तेज धूप में निकलने के कारण लोग बीमार हो रहे हैं।
बीमारियों से बचाव की दी सलाह
जिला अस्पताल के डाॅ. गजेंद्र वर्मा का कहना है कि गर्मी सीजन में रोगियों की संख्या बढ़ती है, लेकिन इस बार गर्मी के तेवर मई में ही बहुत तेज हो गए हैं। बताया कि आने वाले मरीजों में 20 फीसदी उल्टी-दस्त के मरीज हैं। सुझाव देते हुए कहा कि गर्मी के साथ बीमारी से बचाव के लिए घर पर बने ओआरएस का प्रयोग करें। दूषित और बासी खान-पान के सेवन से परहेज करें। तेज धूप में सिर ढंक कर निकलें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर घर से बाहर निकलें।
गर्मी से बचाव के लिए खुद दिखानी होगी सतर्कता
डॉ. राघवेंद्र मोहन ने बताया कि गर्मी में बचाव के लिए खुद सतर्कता दिखानी पड़ेगी। दोपहर में 12 से तीन बजे तक जरूरी न हो तो घर न निकलें। अगर जरूरी है तो अंगोछा सिर पर हो। साथ में पानी की बोतल हो। ठंडा नहीं बल्कि सामान्य तापमान का पानी पीना चाहिए। अधिक गर्मी में तेज ठंडा पानी पीएंगे तो गले में खरास और दिक्कत आएगी।
लू वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद