फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

---तो शंखा नदी पार कर 40 बीघा गन्ने में घुसा बैठा है टाइगर

विज्ञापन
विज्ञापन
- शंखा नदी के पास है 40 बीघा गन्ने का खेत
विज्ञापन

- इस खेत में लोकेशन ट्रेस करना खासी मुश्किल
फतेहगंज पश्चिमी। बुधवार को चौथे दिन भी वन विभाग की टीम अगरास में बाघ की लोकेशन ट्रेस नहीं हुई। आशंका जताई जा रही है कि शंखा नदी के उस पार 50 मीटर दूर मढ़ौली के रकबे में पूर्व ब्लॉक प्रमुख भद्रसेन गंगवार के 40 बीघा गन्ने में छिपा हो सकता है। वन क्षेत्राधिकारी ने टाइगर को पकड़ने में क्षेत्रवासियों से भी सतर्कता बरतने और टीम को जरूरी सहयोग देते रहने की अपील की है।
अगरास के जंगल में बुधवार को चौथे दिन भी वन विभाग के आधा दर्जन कर्मी गन्ने में छिपे टाइगर की टोह लेते रहे लेकिन वह दिखा नहीं है। पिछले तीन दिनों से किसी ग्रामीण ने भी टाइगर को देखने का दावा नहीं किया है। देर शाम वन क्षेत्राधिकारी अनिल मिश्रा ने बताया कि ज्यादा संभावना है कि टाइगर अगरास के वीरसहाय के गन्ने के खेत से निकलकर शंखा नदी पार कर मढ़ौली के रकबे में पूर्व ब्लॉक प्रमुख भद्रसेन गंगवार के 40 बीघा गन्ने के खेत में जा छिपा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इनसेट
तेज भूख लगने पर ही आएगा बाहर
लेकिन अब दिक्कत यह है कि 10-12 फुट ऊंचे गन्ने के खेतों में छिपे बाघ की लोकेशन कैसे ट्रेस की जाए। रेंजर बताते हैं कि गुजरे शनिवार को ही टाइगर ने नीलगाय का 40 किलो से ज्यादा मांस खाया है लिहाजा 8-10 दिन तक उसे दूसरे बड़े शिकार की शायद जरूरत नहीं पड़ेगी। वैसे नीलगायों के अलावा जंगली सुअरों के बच्चे, हिरन, खरगोश, सियार आदि भी गन्ने के खेतों में बड़ी तादाद में रहते हैं। हल्की भूख लगने पर टाइगर इनमें से भी किसी को शिकार बना सकता है। लिहाजा पिंजड़ा लगाने पर भी वह शिकार की तलाश में गन्ने से बाहर निकलेगा इसकी संभावना कम है। ऐसे में गन्ना कटने पर ही बाघ बाहर आ सकता है। या फिर तेज भूख लगने तक टीम को इंतजार ही करना पड़ेगा। वैसे उच्चाधिकारियों ने टाइगर की लोकेशन ट्रेस होते ही पिंजड़ा और दीगर जरूरी साजोसामान मुहैया करवा देने का भरोसा दिलाया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें