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टॉपर तो छोड़िए, आईएएस बनने का भी नहीं सोचा था

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बरेली। आईएएस अधिकारी और फिलहाल बरेली विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष के पद पर तैनात दिव्या मित्तल बताती हैं कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर की पढ़ाई के दौरान उनका सपना आईएएस नहीं बल्कि इंजीनियर बनने का था। टॉपर बनने की दौड़ में भी वह कभी शामिल नहीं रहीं, लेकिन नंबर हमेशा अच्छे आए। आईएएस बनने का तो सोचा ही नहीं था। यह सब इत्तफाक से हुआ कि लंदन में पति के साथ बेहद अच्छी तन्ख्वाह पर नौकरी लगने के बाद भी उसे छोड़कर भारत लौट आईं और फिर आईएएस अधिकारी बन गईं।
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दिव्या बताती हैं कि वह मूलरूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं लेकिन उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। दिल्ली में ही उनकी ज्यादातर पढ़ाई भी हुई। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट करने के बाद दिल्ली में ही बीटेक किया और फिर आईआईएम बंगलूरू से एमबीए। शादी होने के बाद उनकी और उनकी पति की लंदन में बहुत अच्छे पैकेज पर नौकरी लग गई लेकिन दूसरे देश में दोनों का ही ज्यादा दिन मन नहीं लगा। वे दोनों इस्तीफा देकर लंदन से वापस भारत लौट आए। इसी के बाद उन्होंने आईएएस की तैयारी शुरू की। 2012 में उनका चयन आईपीएस में हो गया और गुजरात कैडर मिला। आईपीएस की ट्रेनिंग करते हुए ही 2013 में उन्होंने फिर आईएएस परीक्षा दी और क्वालीफाई भी कर लिया। दिव्या कहती हैं कि यह हमेशा उनकी धारणा रही कि पढ़ने-लिखने के बाद मकसद सिर्फ पैसा कमाना न होकर समाज और देश के लिए कुछ करने का भी होना चाहिए। स्टूडेंट अगर बड़े सपने देखें और उसी के हिसाब से मेहनत करें तो कुछ भी असंभव नहीं हो सकता। मन में ठान लिया जाए तो कोई बाधा रोड़ा नहीं बन सकती। दिल्ली जैसे शहर में परवरिश के बाद भी उनका सपना था कि देश के ग्रामीण इलाकों में जाकर कुछ अलग हटकर करूं। वही करने की कोशिश भी कर रही हैं।

गांव से निकले गगनदीप ने भी छुआ गगन
बीडीए वीसी दिव्या मित्तल को आईएएस बनने की प्रेरणा उनके पति गगनदीप सिंह से मिली। भटिंडा के छोटे से कस्बे गिदड़बाग में रहने वाले गगनदीप सिंह भी पढ़ाई में प्रतिभाशाली थे। उन्होंने पंजाब में ही प्रारंभिक पढ़ाई की। इंजीनियरिंग के स्टूडेंट थे, शादी के बाद दिव्या के साथ ही नौकरी ज्वाइन की। गगनदीप इससे पहले सिंगापुर समेत कई जगह नौकरी कर चुके थे। दिव्या बताती हैं कि विदेशों में पैसा बहुत था लेकिन फिर भी उनकी तरह गगनदीप का भी मन वहां नहीं लगा। उन्होंने उनसे वापस भारत चलने को कहा, अच्छी नौकरी छोड़ने का फैसला करना मुश्किल था। काफी चर्चा के अंत में दोनों ने तय किया कि जो करेंगे अपने देश में ही करेंगे। फिर दोनों ने दिल्ली आकर आईएएस की तैयारी शुरू कर दी। दिव्या बताती हैं कि आईएएस बनने के लिए उन्होंने और गगनदीप ने कभी कोचिंग नहीं की। घर पर ही पढ़ाई की। गगनदीप ने 2011 में आईएएस क्वालीफाई किया और उन्होंने 2013 में। दोनों यूपी कैडर के आईएएस हैं। पति गगनदीप सिंह आईएएस एलाइड में भारत सरकार की सेवा में कानपुर में पोस्टेड हैं।
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