बरेली। दक्षिण-पश्चिम हवाएं चलने के बाद मानसूनी बारिश से मौसम खुशगवार हो गया। पारा सामान्य से चार डिग्री तक नीचे लुढ़कने से कई दिन से पड़ रही गर्मी से लोगों को राहत मिली। हालांकि उमस ने लोगों को परेशान किया। मौसम वैज्ञानिकों ने सोमवार को भी दिन और रात में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की भविष्यवाणी की है।
लंबे इंतजार के बाद रविवार की बारिश ने लोगों को राहत दिलाई। करीब 10.30 बजे एकाएक बूंदे पड़ने लगीं। करीब 10 मिनट तक झमाझम बारिश हुई और बाद में रिमझिम-रिमझिम बूंदे काफी देर तक पड़ती रहीं। अपराह्न 12.30 बजे बारिश रुक गई और हल्की धूप निकल आई। अपराह्न चार बजे तक उमस भरी गर्मी पड़ने के बाद एक बार फिर सूरज बादलों की ओट में छिप गया। लेकिन शाम छह बजे बूंदाबांदी फिर शुरू हुई तो रुक-रुककर होती रही।
न्यूनतम तापमान 27.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया जो सामान्य से एक डिग्री अधिक था। अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस रहा। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डा. एचएस कुशवाहा ने बताया कि पहली जुलाई को 20 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई। दक्षिण पश्चिम मानसूनी हवाएं बादल बना रही हैं। हालांकि मानसून खंडित होने से बारिश बहुत ज्यादा नहीं हो पा रही है। सोमवार को भी आसमान में बादल रहेंगे, जिनसे बारिश होने के पूरे आसार हैं। तीन और चार जुलाई को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे लेकिन बारिश होने की संभावना कम है।
धान के लिए वरदान
कृषि विशेषज्ञ डा. रनजीत सिंह का कहना है कि मानसून की बारिश धान के लिए तो किसी वरदान से कम नहीं। गर्मी से झुलस रही खरीफ बाकी फसलों को मानसूनी बारिश से राहत मिलेगी। फलों की खासतौर से आम की गुणवत्ता सुधरेगी। किसान धान की फसल का पलेवा करने के लिए खेत में पानी लगाने की सोच रहे थे, उनको डीजल खर्च नहीं करना पड़ेगा। धान की पौध भी बारिश होने से हरी-भरी बनी रहेगी। बारिश होने के बाद ढैंचे को किसान अपने खेत में जोतकर उसकी हरी खाद बना सकते हैं। सब्जियों को भी बारिश से फायदा है, लेकिन किसान खेत में पानी न रुकने दें। मानसूनी बारिश में भूमिगत जलस्तर में सुधार होगा। धरती की गर्मी कम होगी। किसानों को सलाह है कि मेंथा की फसल काट लें। अन्यथा बारिश होने से तेल की मात्रा प्रभावित होगी।