कोचिंग संचालक अभिभावकों से मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे। एक निर्धारित सीमा तक ही वो फीस ले सकेंगे। क्षेत्रीय उच्चशिक्षा विभाग कोचिंग पर लगाम लगाने के साथ ही फीस को लेकर भी गाइड लाइन बनाने की तैयारी में है। पंजीकृत कोचिंग संस्थानों को नवीनीकरण कराने का नोटिस जारी करने के साथ ही शिक्षकों को ब्योरा और कितनी फीस ली जा रही है उसकी भी जानकारी मांगी है।
कोचिंग संस्थानों को लेकर अब तक कोई मानक तय नहीं है। बच्चों की संख्या के अनुसार पंजीकरण शुल्क लिया जाता है। उसके बाद कोचिंग संचालक कितनी फीस वसूलते हैं तय नहीं है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली कोचिंग को छोड़ दें तो कक्षा आठ तक दो से तीन हजार रुपये प्रतिमाह, बारहवीं स्तर पर प्रति विषय एक हजार से 12 सौ रुपये तक वसूलते हैं। बीएससी स्तर पर भी प्रति विषय मोटी फीस वसूली जाती है। इसके अलावा बिना पंजीकरण वाली कोचिंग भी अच्छी खासी फीस वसूलते हैं। अब इन कोचिंग पर नकेल कसने की तैयारी है। बिना पंजीकरण वाली कोचिंग पर पचास हजार तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा कोचिंग की फीस भी निर्धारित की जाएगी।
तीन हजार से ज्यादा कोचिंग, 14 सौ पंजीकृत, नवीनीकरण कराने वाले नाममात्र
शहर में ही करीब तीन हजार से ज्यादा कोचिंग संचालित होती हैं। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सिर्फ 1400 ही पंजीकृत हैं। इसमें भी पंजीकरण नवीनीकरण कराने वाली कोचिंग नाममात्र हैं। जुलाई में 24 कोचिंग को नवीनीकरण लंबित है, नोटिस के बाद भी इन कोचिंग ने पंजीकरण नहीं कराया। वहीं कई कोचिंग शहर में गुम हो गईं। विभाग को उनका पता ही नहीं मिल रहा। सूत्रों की माने तो 1400 में से चार से पांच सौ ही कोचिंग ऐसी हैं जो तीन साल के अंतराल पर नवीनीकरण कराती हैं, बाकी ने पंजीकरण लेकर नवीनीकरण ही नहीं कराया। अब नोटिस जारी होने के बाद कोचिंग संस्थानों में खलबली मची है। ज्यादातर कोचिंग संचालक पंजीकृत से कई गुना ज्यादा छात्रों को पढ़ाते हैं।
इस तरह से लिया जाता है पंजीकरण शुल्क
10 से अधिक छात्र पर 250 रुपये
11 से 20 छात्रों तक 1000 रुपये
21 से 40 छात्रों तक 4000 रुपये
41 से 50 छात्रों तक 5000 रुपये
51 से 100 छात्रों तक 10000 रुपये
101 से 200 छात्रों तक 20000 रुपये
200 से अधिक छात्रों पर 25 हजार रुपये