फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘कहीं-कहीं भारी पड़ता है नैतिकता का दबाव’

Sun, 08 Oct 2017 12:07 AM IST
विकास शुक्ल, लखीमपुर खीरी
विज्ञापन
‘कहीं-कहीं भारी पड़ता है नैतिकता का दबाव’ - फोटो : लखीमपुर खीरी, अमर उजाला
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी।
विज्ञापन

हमारा देश संतों और सुधारकों का देश है। हमें बचपन से नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाता है। कहीं यह नैतिकता न खो जाए इस डर से कई मुद्दों पर लोग चुप रहते हैं। ऐसा ही बाल शोषण और महिला उत्पीड़न के मामले में भी होता है और यही चुप्पी समाज पर भारी पड़ रही है, जिसे तोड़ना होगा। इसी चुप्पी को तोड़ने के लिए हम कन्याकुमारी से यात्रा लेकर निकले हैं। लोगों को बोलना होगा। यह कहना है नोबेल पुरस्कार प्राप्त कैलाश सत्यार्थी का।
बाल एवं महिला यौन शोषण के खिलाफ लखीमपुर खीरी पहुंची भारत यात्रा के दौरान अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि बच्चों और महिलाओं के शोषण के मामले में लोग कभी सड़कों पर नहीं उतरे, लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं। लोग जागरूक हो रहे हैं। सरकारों ने भी इस ओर ध्यान देना शुरू किया है।
विज्ञापन

बाल एवं महिला उत्पीड़न के मामलों में कमी नहीं आ रही है? इस सवाल के जवाब में सत्यार्थी ने कहा कि देखिए लोगों की मानसिकता अभी नहीं बदली है। दूसरा न्याय मिलने में देर हो ही जाती है। स्थिति यह है कि 96 प्रतिशत मामले कोर्ट में लंबित रह जाते हैं। ऐसा संभव है कि किसी के साथ बाल उत्पीड़न हुआ हो और वह पोते-पोतियों के साथ केस लड़ने जाए, लेकिन अब सरकारों ने इस ओर ध्यान देना शुरू किया है।
विज्ञापन

पिछले दिनों राजनाथ सिंह ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले में पार्लियामेंट बिल लाने की बात कही। एमपी के मुख्यमंत्री ने मंशा जाहिर की कि ऐसा विधेयक लाएंगे जिसमें बलात्कारी को फांसी हो। यूपी के मुख्यमंत्री ने भी अलग से कानून बनाने को आश्वस्त किया। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्राबाबू नायडू ने बाल उत्पीड़न के मामले में गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई का प्रावधान किया है। स्थितियां बदल रही हैं। इस यात्रा के माध्यम से देश जुड़ रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें