हिंदुस्तान और पाकिस्तान के खराब रिश्ते का हर नागरिक पर असर पड़ता है। शहर के मलूकपुर के घेर शेख मिट्ठू के रहने वाले यूसुफ अली खां की बेटी महक खान को सरहद के तनाव का खामियाजा भुगताना पड़ा। महक पाकिस्तानी नानी साजदा बेगम के घर पैदा हो गई। उसकी खता इतनी सी थी कि पाकिस्तान की जमीन पर उसने आंखें खोलीं। इसलिए उसे अपनी मां शबाना के साथ पाकिस्तानी नागरिक बनाकर हिंदुस्तान लाना पड़ा। शबाना 31 साल और महक को 30 साल के संघर्ष के बाद भारतीय नागरिकता मिली है। महक की मां शबाना को शादी की सालगिरह के दिन नागरिकता का तोहफा मिला है। चार महिलाओं को नागरिकता मिलने से तीनों घरों में खुशियां मनाई जा रही हैं। बृहस्पतिवार को एडीएम सिटी ओपी वर्मा ने महक और शबाना समेत चार महिलाओं को भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र दिया।
यूसुफ हसन खान पाकिस्तान के करांची की शाह फैसल कालोनी की शबाना खान के साथ निकाह करके 24 अगस्त 1986 को विदा कराकर हिंदुस्तान लाए थे। वादा किया था तुमको हिंदुस्तान की नागरिकता दिलाकर अपने साथ रखूंगा। शबाना शादी के बाद यूसुफ हसन खां के साथ तो रहीं, लेकिन वह नागरिकता दिलाने का वादा पूरा नहीं कर पाए। शादी के बाद 1987 में शबाना के वालिद फारूख सिद्दीकी की तबियत अचानक खराब हो जाने पर उन्हें पाकिस्तान जाना पड़ा। वालिद की तबियत इतनी खराब थी कि हिंदुस्तान लौटना मुनासिब नहीं था। मायके में ही शबाना ने बेटी को जन्म दिया। यूूसुफ की बहन इसरार बेगम को जब यह पता लगा कि शबाना ने बेटी को जन्म दिया है तो उन्होंने यहीं से फोन करके महक का नाम रख दिया। इसके बाद महक के नाम से ही उसका पासपोर्ट और पहचान पत्र बनवाने के बाद शबाना उसे हिंदुस्तान लाईं। मां के साथ आने के बाद अपने ही देश के लिए वह पराई हो गईं। इसके बाद यूसुफ के बाकी बच्चों के लिए महक भले ही अपनी थी लेकिन कानूनी तौर पर तो पाकि स्तानी नागरिक ही थी। महक की पढ़ाई-लिखाई सब यहीं हुई। पाकिस्तान से उसका इसके बाद कोई खास वास्ता नहीं रहा। सिर्फ इतना ही था कि वहां उसकी ननिहाल है। इसके बाद भी उसे नागरिकता नहीं मिली। यूसुफ शबाना और महक दोनों की नागरिकता के लिए जंग लड़ते रहे। इसी बीच परिवार वालों ने फुफेरे भाई मुनीर खां से महक की शादी कर दी। अब महक के दो बच्चे हैं।
34 साल बाद नानी बनकर मिला नागरिकता का प्रमाण
मेगासिटी में रहने वाले किराना व्यापारी प्रेम प्रकाश की शादी 18 फरवरी 1983 को पाकिस्तान के जिला सांगड़ के शाहदातपुर की रहने वाली भगवानी बाई उर्फ जया के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही प्रेम प्रकाश ने पत्नी की नागरिकता के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे। करीब 55 साल की उम्र में 34 साल बाद भगवानी बाई को भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र मिल पाया है। एडीएम के हाथों प्रमाण पत्र मिलने के बाद भगवानी बाई के चेहरे पर खुशी देखने लायक थी। भगवानी बाई की दो बेटियों की शादी हो चुकी है। नानी बनने के बाद उन्हें नागरिकता मिली है। जोश में कहने लगीं अब मैं भी हिंदुस्तानी हूं। हिंदुस्तान का पासपोर्ट बनवाने के लिए अब आवेदन करना है। इसके बाद मायके घूमने जाना है। उनके पति कभी ससुराल ही नहीं जा पाए। सोचा है एक बार उन्हें भी साथ लेकर जाना है।
मोदी जी के आर्शीवाद से मिली नागरिकता
चार अगस्त 1991 को पाकिस्तान के शहदातपुर की अनीता सिंह की शादी फर्राशीटोला निवासी दिलीप कुमार के साथ हुई थी। वर्तमान में अनीता की उम्र करीब 46 साल है। अनीता ने बताया कि उस समय उनकी उम्र 19 साल थी। पाकिस्तान का माहौल उन दिनों हिंदू बेटियों के लिए सही नहीं था। हालांकि उनके पिता का अच्छा कारोबार था। सिंध प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम के बीच कोई खास दिक्कत भी नहीं थी। कभी कभार फिर भी विवाद की स्थिति बन जाती थी। पिता जी ने उसे महफूज करने के लिए हल्द्वानी भाई के पास भेज दिया था। उनके भाई पहले ही हल्द्वानी में रह रहे थे। भाई के पास रहकर ही उनकी शादी हुई। शादी के बाद उसे सिर्फ एक बार ही मायके जाने का मौका मिला। दिलीप कभी उनके घर नहीं गए। नागरिकता के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा है। तमाम बैरियर लगा दिए जाते थे। देश में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के बाद जवाबदेही तय हो गई। इसलिए उन्हें नागरिकता मिल गई। अनीता ने बताया कि उनकी 24 साल की बेटी और 16 साल का बेटा है। भारत की नागरिकता मिलने के बाद मेरा परिवार बहुत खुश है।