बढ़ते तापमान में अगर आपने अपने जानवरों की हिफाजत नहीं की तो वह बांझपन का शिकार हो सकते हैं। दुधारू जानवरों में दूध देने की क्षमता कम हो सकती है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग के वैज्ञानिकों के ताजा शोध में यह सच्चाई सामने आई है। गर्मी बढ़ने से जानवरों के जीन प्रभावित हो रहे हैं जिससे शरीर की बाकी क्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। वैज्ञानिकों की टीम जानवरों की कोशिकाओं में पाए जाने वाले हीट शोक प्राटीन (एचएसपी) पर कार्य कर रही है। तापमान बढ़ने के साथ ही शरीर में यह एचएसपी बढ़ने लगते हैं जिससे जानवरों के शरीर की पूरी संरचना प्रभावित होने लगती है। शोध करने वाली टीम अब किसानों को जागरूक कर रही है कि जानवरों को धूप में न रखें। कुछ दवाइयां भी बताई जा रही है ताकि उनको खिलाकर जानवरों को बढ़ते तापमान में सुरक्षित रखा जा सके।
वातावरणीय प्रकोष्ठ में देखा जाता है तापमान का असर
विभाग में वातावरणीय प्रकोष्ठ में तापमान का जानवरों पर क्या असर पड़ता है उसपर शोध किया जाता है। आईवीआरआई के दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पुनीत कुमार के अनुसार 39 डिग्री तक जानवरों में एचएसपी सामान्य रहते हैं पर यहां से जैसे ही तापमान बढ़ता है तो इनका बढ़ना शुरू हो जाता है। सेल्स में जमा प्रोटीन की परत बनने लगती है और शरीर की क्रियाएं प्रभावित होेने लगती है। विभाग की हेड डॉ. जी तारू शर्मा के अनुसार उच्च तापमान इंसानों के साथ जानवरों के शरीर पर प्रतिकूल असर डालता है। पशुपालन करने वाले किसानों को अब जागरूक कर रहे हैं कि वो जानवरों को धूप से बचाएं।
इन पर देखा जा रहा है प्रभाव
-शारीरिक क्रियाएं
-रासायनिक क्रियाएं
-जीन लेवल
यह हो रहा प्रभाव
-जानवरों का वजन कम हो जाना।
-दूध उत्पादन कम हो जाना।
- प्रजनन क्षमता प्रभावित होना।