बरेली। गर्मी इस बार पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा झुलसा ही नहीं रही बल्कि शरीर का पानी भी ज्यादा सोख रही है। विशेषज्ञों की मानें तो वातावरण की नमी इस बार पिछले सालों की तुलना में आधी से भी कम है, लिहाजा सिर्फ आदमी नहीं बल्कि पेड़-पौधे और जानवरों के लिए भी इसकी मार से बचना भारी पड़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि सन बर्न और हीट स्ट्रोक जैसे तात्कालिक दुष्प्रभावों के अलावा यह सूखी गर्मी इंसानों को ऐसी बीमारियां भी दे सकती है जिनके लक्षण कुछ समय बाद सामने आएंगे, लिहाजा लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
मौसम में नमी की इस भारी कमी को विशेषज्ञ प्रमुख रूप से ग्लोबल वार्मिंग का असर मान रहे हैं। उनका कहना है कि इसी वजह से तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। मौसम विज्ञानी डॉ. जेपी गुप्ता के मुताबिक गर्मी के मौसम में मई के महीने में आमतौर पर 35-50 प्रतिशत आर्द्रता सामान्य मानी जाती है मगर इस गर्मी में आद्रता घटकर 15-35 यानी सामान्य की तुलना में करीब आधी ही रह गई है। आर्द्र्रता घटने के कारण कम तापमान भी ज्यादा महसूस होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सूखी गर्मी की वजह से ही सबकुछ सूख सा रहा है। बाहर निकलने पर त्वचा का बहुत जल्दी खुश्क हो जाना और होंठ-गला सूखने लगना इसी का लक्षण है। बरेली कॉलेज में बॉटनी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आलोक खरे कहते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग से आद्रता में आई इस कमी से बचने के लिए अगर पौधरोपण और जल संरक्षण को बढ़ावा नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह शून्य पर भी पहुंच सकती है। उस हालात में गर्मी सहन करना बेहद मुश्किल हो जाएगा और बीमारियां भी खूब बढ़ेंगी।
खतरे में नाजुक पौधे और इंसान की आंखें
मोतियाबिंद का खतरा बढ़ा, बाहर निकलें तो चश्मा जरूर पहनें
नाजुक पौधों को लगातार पानी देने की जरूरत वर्ना सूख जाएंगे
बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आलोक खरे का कहना है कि यह समय नाजुक पौधों के लिए सबसे खतरनाक है। छह महीने तक की उम्र के पौधों को अगर समय पर पानी नहीं मिला तो मिट्टी में नमी खत्म होने से उन्हें बचाना मुश्किल हो सकता है। इसकी वजह से ही पौधरोपण में लगने वाले अधिकांश पौधे खत्म हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें लगातार पानी देने की जरूरत है। इंसानों में इसकी कमी से शरीर का ज्यादा पानी सूखने लगता है। हीट स्ट्रोक, आई फ्लू और ड्राई आइज की वजह से मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि मोतियाबिंद आंखों में नमी खत्म होने से होता है और इस मौसम में नमी कम होने के कारण आंखें सूखने लगती हैं। ऐसे में बाहर निकलते समय चश्मा जरूर पहनना चाहिए। इसके अलावा हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन भी होने लगता है। दिल के रोगियों को भी यह गर्मी ज्यादा भारी पड़ सकती है।
किसानों को सलाह.. शाम के वक्त लगाएं फसल में पानी
इस समय खेतों में मेंथा, आम, उड़द, मूंग के अलावा लौकी, तोरई, खीरा, टिंडा, मिर्च और बैंगन आदि की फसलें तैयार हैं। इन फसलों के लिए आर्द्रता 70-80 होनी चाहिए। मगर, इसके घटने से इन फसलों का फूल गिर जाता है। ओवरी की उचित वृद्धि न होने से खीरा आगे-पीछे से पतला हो जाता है। पानी की कमी से फल की बढ़वार प्रभावित हुई है। इसके चलते ही किसानों के एडवाइजरी भी जारी की गई है कि फसल में पानी दिन के बजाय शाम को लगाएं। दिन में पानी लगाने से नमी में उतार-चढ़ाव होगा और फूल गिर जाएंगे। शाम को पानी लगाएंगे तो नमी का असर ज्यादा समय रहेगा। इसके अलावा पौधे मेड़ों पर लगाएं और उनके बीच जलसंरक्षण का इंतजाम करें। इसके लिए पेड़ों के बीच पुआल या पत्ते आदि बिछाएं ताकि जमीन में नमी बनी रहे। - डॉ. रंजीत सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
जानवरों में भी बढ़ा चिड़चिड़ापन और बीमारियां
आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े के मुताबिक गर्मी बढ़ने से जानवरों को डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक की बीमारी बढ़ी है। इसके चलते पहले जिस जानवर को पांच बोतल ग्लूकोज चढ़ता था, अब उसे 25 बोतल चढ़ रहा है। गर्मी से बचने के लिए जानवर छाया ढूंढते हैं और बार-बार छाया से हटाने पर हमलावर हो जाते हैं। इन दिनों में घोड़े के काटने की घटनाएं भी बढ़ जाती है। जंगल में भी यही स्थिति है। जंगली सुअर नमी चाहते हैं और इन दिनों खुश्की है। ऐसे में वे गांव के आसपास पहुंच रहे हैं और विरोध की आशंका में ही हमलावर भी हो रहे हैं। इस मौसम में पशुओं को छाया में रखें और समय पर पानी पिलाते रहें ताकि उसे गर्मी के असर से बचाया जा सके।
त्वचा, फेफड़े, गुर्दे और आंखों पर खतरा ज्यादा
नमी कम होने से त्वचा की म्यूकस मेंबरेन (त्वचा की ऊपरी परत) खुश्क हो जाती है। बहुत सूखने पर यह मेंबरेन क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है। वहीं, नाक से खून निकल सकता है। फेफड़ों की नलियां सूखने से सूखी खांसी आने लगती है। ड्राई आइज (आंखों का पानी सूखना) की समस्या भी बढ़ती है। वहीं, त्वचा में खुजली वाले लाल दाने निकलने शुरू हो जाते हैं और पानी की कमी से गुर्दे की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। - डॉ. बागीश वैश्य, फिजीशियन, जिला अस्पताल
रोजेदार ज्यादा खतरे में.. रखें ये ख्याल
डॉक्टरों के मुताबिक इन गर्मियों में रोजेदारों की सेहत खराब होने का खतरा ज्यादा है। चूंकि रोजा रखने पर पानी बिल्कुल नहीं पिया जाता लिहाजा जरा सा बेपरवाह होते ही रोजेदार गर्मी के शिकार हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें एहतियात बरतने की खास जरूरत है। डॉक्टरों ने रोजेदारों को कुछ खास टिप्स भी दिए हैं।
- सहरी या इफ्तार में कम तली हुई चीजें ही खाएं।
- तैलीय चीजों से बचें क्योंकि इनसे प्यास लगती है।
- सहरी में प्रोटीन और फाइबर वाली चीजें ज्यादा लें ताकि लंबे समय तक पेट भरा रहे।
- उबली चीजें ज्यादा खाएं। चाय, कॉफी पीने से बचें।
- इफ्तार की शुरुआत बहुत ही हल्की चीजों से करें।
- सहरी के वक्त हरी पत्तेदार सब्जियां और सलाद खूब खाएं।
- सहरी से पहले और इफ्तार के बाद जितना हो सके पानी पिएं।
- सुबह 11 से शाम 5 बजे के बीच घर से बाहर कम निकलें।
- सफेद कपड़े पहनें, सिर पर रूमाल या कपड़ा डाले रखें।
- बेवजह चलने, दौड़ने और बोलने से बचें, आराम करें।
दो दिन और झुलसाएगी गर्मी फिर पांच दिन राहत
बरेली। चिलचिलाती धूप के साथ गर्म हवाएं ही नहीं मौसम में घटी आर्द्रता (नमी) भी मुसीबत की शक्ल से ले रही है। बृहस्पतिवार को तापमान सामान्य से पांच डिग्री अधिक हुआ तो आर्द्रता सामान्य से घटकर करीब आधी रह गई। आर्द्रता में कमी न सिर्फ इंसानों के लिए घातक है, इससे जीव-जन्तु और वनस्पति भी प्रभावित होने लगी है। इंसानों को हीट स्ट्रोक, चिकन पॉक्स, आई फ्लू और मोतियाबिंद का खतरा बढ़ा है। पशु चिड़चिड़े और पानी की कमी से बीमार हो रहे हैं, वहीं टेंडर (नाजुक) पौधे मुरझाकर दम तोड़ रहे हैं। मगर, सबसे ज्यादा दिक्कत रोजदारों के सामने है, जिन्हें पूरा दिन बिना पानी के ही गुजारना है।
बृहस्पतिवार को सुबह से ही तेज धूप खिली तो दोपहर तक पारा 42.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जो सामान्य से करीब 5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। तेज धूप के साथ गर्म हवाओं ने लोगों को दिन भर झुलसाया। रात में भी राहत नहीं मिली और न्यूनतम तापमान सामान्य से छह डिग्री ज्यादा 25.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं आर्द्रता 15-35 प्रतिशत रही जोकि सामान्य से लगभग आधी थी। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के डायरेक्टर डॉ. जेपी गुप्ता के मुताबिक अरब सागर की हलचल से उठ रहे चक्रवात के कारण गर्म हवाएं मैदानी इलाकों में प्रवेश कर रही हैं। इस वजह से तापमान में भी वृद्धि हो रही है। इन हवाओं का रुख दो दिन बाद बदलने की संभावना है। 11 मई की रात से हवा की दिशा बदलने के बाद हल्के बादल मंडराने शुरू होंगे। इससे 13 और 14 मई को हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद हवा में नमी का स्तर सुधरकर 45-60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।