बरेली। काफी हौसला जुटाने के बाद भोजीपुरा के अनोखेलाल अपने घोड़े ‘राजू’ को लेकर सुबह बरेली तो पहुंच गए लेकिन जैसे ही डॉक्टरों की टीम ने उसे मर्सी डेथ देने की तैयारी शुरू की, उनका दिल लरजने लगा। आंखें भर आईं तो डॉक्टरों ने उन्हें हौसला बंधाया। समझाया कि ‘राजू’ की मौत तो निश्चित हो चुकी है, अब यह उसके ऊपर है कि वह उसे बेहद तकलीफ के साथ तिल-तिल मरते देखना चाहता है या सुकून के साथ कुछ पलों के भीतर। आखिर किसी तरह अनोखेलाल ने खुद को संयत किया, जिस तरह हमेशा काम पर ले जाने से पहले ‘राजू’ के पैर छूते थे, वैसे ही उसके पैर छुए और फिर नजरें फेर लीं। डॉक्टरों के डेथ इंजेक्शन देते ही कुछ पलों के अंदर ‘राजू’ बेहोश होकर जमीन पर गिरा और मिनटों के अंदर कभी न टूटने वाली नींद में सो गया।
‘राजू’ बेहद संक्रामक और जानलेवा बीमारी ग्लैंडर्स का शिकार हो गया था। पिछले महीने पशुपालन विभाग की ओर से जिले के 60 घोड़ों के ब्लड सैंपल जांच के लिए हिसार भेजे थे। रिपोर्ट आई तो दो घोड़ों में ग्लैंडर्स की पुष्टि हुई। एक घोड़ा ‘मुन्ना’ रिठौरा के किशन बाबू का था जिसे डॉक्टरों की टीम ने बुधवार को राधामाधव स्कूल के सामने खाली पड़े मैदान में मर्सी डेथ दी थी और दूसरा भोजीपुरा के गांव बोहित के अनोखेलाल का, जिसे बृहस्पतिवार को मर्सी डेथ देने के लिए बरेली लाया गया। पहले ‘राजू’ को भी ‘मुन्ना’ के साथ मर्सी डेथ देने का फैसला हुआ था, लेकिन ऐन मौके पर अनोखेलाल और उनका परिवार भावुक हो गया और ‘राजू’ की जिंदगी एक दिन और बढ़ गई। पशुपालन विभाग के चिकित्सकों के समझाने के बाद अनोखेलाल बृहस्पतिवार को ‘राजू’ को लेकर बरेली पहुंचे।
श्यामगंज पशु चिकित्सालय के चिकित्साधिकारी डॉ. रामलखन की अगुवाई में डॉ. सुनील कुमार और ब्रूक इंडिया के डॉ. दिनेश गुप्ता ने जब सुरक्षा किट पहनकर ‘राजू’ को डेथ इंजेक्शन लगाने की तैयारी शुरू की तो एक बार वह फिर भावुक हो गए। इंजेक्शन लगने से पहले उन्होंने ‘राजू’ के पैर छुए और फिर कुछ ही मिनटों में डॉक्टरों ने अपना काम पूरा कर लिया। ‘राजू’ की मौत के बाद उसे भी किशन बाबू के घोड़े ‘मुन्ना’ की कब्र के बराबर ही छह फुट गहरा गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। डॉ. रामलखन ने बताया कि जिन दोनों स्थानों पर ग्लैंडर्स पीड़ित घोड़े मिले थे, उसके पांच किमी के दायरे में सभी घोड़ों के ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।
अनोखेलाल ने बताया कि ‘राजू’ को उन्होंने कुछ ही समय पहले खरीदा था। इस खूबसूरत घोड़े से कुछ ही दिनों में घर के सभी लोगों खासा लगाव हो गया। वह ‘राजू’ को ईंट भट्ठे पर ले जाकर ढुलाई का काम लेते थे। हर रोज भट्ठे पर जाने से पहले वह ‘राजू’ के पैर छूते थे। कुछ ही समय ‘राजू’ की बदौलत उनके परिवार की माली हालत बदल गई थी, उन्हें पता ही नहीं चला कि कब मौत दबे पांव उनके ‘राजू’ के नजदीक चली आई।
‘राजू’ के गम में ससुराल में रोई मीना
अनोखेलाल ने बताया कि उन्होंने ‘राजू’ को ईट भट्ठे पर ही काम करते हुए एक व्यक्ति से करीब 25 हजार रुपये में खरीदा था। इसके बाद घर का सारा खर्च ‘राजू’ की ही कमाई से चलने लगा। अपनी बहन मीना की शादी का दहेज भी उन्होंने ‘राजू’ की कमाई से ही जुटाया था। इसी वजह से मीना को ‘राजू’ से सबसे ज्यादा लगाव था। ग्लैंडर्स की रिपोर्ट आने से पहले ‘राजू’ के 30 हजार रुपये एक ग्राहक दे रहा था लेकिन मीना ने उसे बेचने नहीं दिया। एक सप्ताह पहले जब उसे पता लगा कि उसके ‘राजू’ को अब मार दिया जाएगा तो वह खूब रोई। एक दिन पहले ही शादी के बाद मीना विदा हुई थी। ससुराल से बृहस्पतिवार सुबह उसने फोन किया तो सबसे पहले ‘राजू’ ़के बारे में पूछा। रोते हुए कहने लगी किसी तरह ‘राजू’ को बचा लो। अनोखेलाल ने बताया कि उन्होंने अभी तक उसे ‘राजू’ के मारे जाने के बारे में नहीं बताया है।