बरेली। देश की आजादी के बाद अब 17वीं लोकसभा के लिए चुनाव होने जा रहा है। 1952 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ था और तब से अब तक हर चुनाव में मतदाताओं का मूड कुछ अलग रहा है। आंकड़े साफ बताते हैं कि जब निराशा के बादल छाए तो मतदाताओं ने मतदान में दिलचस्पी नहीं ली लेकिन जब भी किसी सरकार का तख्तापलट करना हुआ तो जमकर मतदान किया। बरेली सीट के लिए अब तक सबसे ज्यादा मतदान 1998 में 61.71 प्रतिशत हुआ था। यह वो दौर था जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को सिर्फ एक सांसद की कमी की वजह से सत्ता छोड़नी पड़ी थी। आंवला में सर्वाधिक मतदान 2014 में मोदी लहर के दौरान हुआ। इस चुनाव में पहली बार मतदान 60.22 प्रतिशत का आंकड़ा छुआ था।
बरेली सीट के लिए सबसे कम मतदान 1957 यानी दूसरे लोकसभा चुनाव में हुआ था। उस चुनाव में सिर्फ महज 42.83 प्रतिशत मतदाताओं ने ही अपने वोट का प्रयोग किया। सबसे ज्यादा मतदान 1998 में हुआ जिसमें 61.71 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले। मोदी लहर के दौरान 2014 में भी वोट प्रतिशत बढ़ा लेकिन ये रिकॉर्ड नहीं टूटा और वोट प्रतिशत 61.18 पर सिमटकर रह गया। आंवला सीट पर वोटिंग प्रतिशत देखा जाए तो सबसे कम वोट 1980 में पड़े थे। ये इमरजेंसी के बाद का दौर था। तमाम दलों की मिलीजुली सरकार के गिरने से लोग बुरी तरह नाउम्मीद थे, लिहाजा सिर्फ 42.33 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इस सीट पर सबसे ज्यादा वोटिंग परसेंटेज 2014 में रहा था। मोदी लहर में यहां 60.22 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले और पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। आज फिर मतदान की घड़ी है। आइए इस बार एक नया रिकॉर्ड बनाएं।
बरेली में तीन बार 60 पार, आंवला में सिर्फ एक बार
लोकतंत्र के इस सफर में बहुत कम मौके आए हैं जब बरेली और आंवला में वोटिंग प्रतिशत फर्स्ट डिविजन यानी 60 फीसदी के पार गया है। बरेली में सिर्फ तीन बार ऐसा हुआ है। 1967 में 60.94 प्रतिशत वोट पड़े थे। इसके बाद 1998 में 61.71 प्रतिशत और फिर 2014 में 61.18 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। आंवला की बात करें तो यहां के मतदाताओं ने सिर्फ एक बार वोटिंग प्रतिशत को 60 के पार पहुंचाया। 2014 में मोदी लहर में यहां सर्वाधिक 60.22 प्रतिशत वोट पड़े थे।
आइए, इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दें
मंगलवार यानी आज फिर लोकतंत्र का महापर्व है। देश के लिए एक मजबूत सरकार चुनने की चुनौती फिर आपके सामने है, ऐसे में आपका कर्तव्य बनता है कि वोट जरूर डालें। यह जरूर ध्यान रखें कि वोट न डालने का कलंक हमेशा पढ़े-लिखे और पॉश कॉलोनियों में रहने वाले समाज पर लगता रहा है, लिहाजा यह मौका है जब इस कलंक को मिटाया जा सकता है। प्रशासन की ओर से वोट परसेंटेंज बढ़ाने के लिए भरपूर कोशिश की गई है, मौसम के भी अनुकूल रहने की भविष्यवाणी की गई है लिहाजा वोट डालने में कोई चूक न करें वर्ना शायद आने वाले पांच साल तक आपको अपने आलस पर खेद का शिकार होना पड़ सकता है।
लोकतंत्र का इतिहास
बरेली सीट
1957- 42.83
1962- 50.72
1967- 60.94
1971- 46.70
1977- 53.19
1980- 44.62
1984- 54.03
1989- 51.82
1991- 58.30
1996- 50.60
1998- 61.71
1999- 58.54
2004- 52.88
2009- 50.36
2014 - 61.18
आंवला सीट
1967- 54.96
1971- 42.45
1977- 51.80
1980- 42.33
1984- 49.65
1989- 54.20
1991- 52.37
1996- 48.27
1998- 55.55
1999- 58.70
2004- 46.82
2009- 53.78
2014- 60.22