फरीदपुर। गर्भवती का इलाज न करने और अस्पताल से भगा देने के मामले में डॉक्टर और स्टाफ दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट सीएमओ को भेज दी गई है। वहीं मामले को लेकर अस्पताल में हड़कंप मचा है।
फरीदपुर के ग्राम जेढ निवासी अखिलेश की पत्नी सुनीता प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भर्ती होने आई थीं। डॉक्टर ने उसे भर्ती नहीं किया और वह कई घंटे अस्पताल का चक्कर काटती रही। शाम को अधीक्षक डॉ. वासित अली और बाद में सीएमओ से भी शिकायत की गई, लेकिन स्टाफ ने उसे भर्ती नहीं किया। गर्भवती को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। अमर उजाला ने डॉक्टर की लापरवाही की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की। इसके बाद स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई। डॉ. वासित ने डॉ. राशिद से जांच कराई तो डॉक्टर कल्याणी और स्टाफ दोषी पाया गया है। इसकी रिपोर्ट सीएमओ को भेज दी गई। वहीं हाईकोर्ट का हवाला देकर दो युवकों को इलाज न करने के मामले में भी डॉ. तौफीक से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
सोती मिली नर्स, विस्तर हटवाए
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बेहद खराब है। रविवार रात करीब एक बजे डॉ. वासित अली ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान नर्सों के कमरे बंद मिले। वह अंदर सो रही थी। कमरों से उनके बिस्तरों को हटवाया गया। सोमवार सुबह ही अधीक्षक ने नर्सों को कड़ी चेतावनी दी। फिर ऐसा मिलने पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
‘ गर्भवती को भर्ती न करने के मामले में डॉक्टर कल्याणी और स्टाफ दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट सीएमओ को भेज दी है। हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर दो युवकों का इलाज न करने के मामले में डॉ. तौफीक से भी स्पष्टीकरण मांगा है। औचक निरीक्षण में नर्सें सोती मिलीं। उनके बिस्तर हटवा दिए गए हैं।’
-डॉ. वासित अली, सीएचसी अधीक्षक फरीदपुर