बरेली। शैक्षिक सत्र समाप्त होने को है, अभिभावक अब भी शुल्क अध्यादेश से उम्मीद लगाए बैठे कि शायद उनको मनमाने शुल्क से निजात मिल जाए, लेकिन अफसरों की मंशा शायद उनकी उम्मीदों से खिलवाड़ करने की है। यही वजह है कि मामले की फाइल दफ्तरों के चक्कर काट रही है। अफसर फुटबॉल की तरह फाइल को इधर से उधर किक मार रहे हैं। जिला शुल्क समिति के सचिव डीआईओएस ने बैठक का समय मांगने के लिए फाइल डीएम को भेजी थी। डीएम ने यह कहते हुए फाइल वापस कर दी कि पहले वार्ता करेंगे उसके बाद बैठक होगी। इससे यह तो साफ हो गया कि 31 मार्च को समाप्त हो रहे इस शैक्षिक सत्र में अभिभावकों को राहत नहीं मिलने वाली।
स्कूलों के रिकॉर्ड का परीक्षण पूरा हो गया है। 35 से ज्यादा स्कूल हैं, जहां 20 से 30 फीसदी फीस बढ़ाई गई। जिला शुल्क समिति ने फिर से स्कूलों से रिकॉर्ड मांगे और उनका परीक्षण किया। उसमें भी यही स्थिति सामने आई। करीब दो माह से कार्रवाई लंबित है, जबकि डीएम ने पंद्रह दिन के भीतर मामला निस्तारित करने को कहा था। दो दिन पूर्व ही डीआईओएस ने बैठक का समय मांगने के लिए फाइल डीएम के पास भेजी। मंगलवार को डीएम ने फाइल वापस कर दी और कहा कि पहले वार्ता कीजिए। उसके बाद बैठक और आगे की कार्रवाई होगी। अब ये माना जा रहा है कि 31 मार्च तक फाइल इधर से उधर की जाएगी। शैक्षिक सत्र खत्म होने के बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सभी अफसर उसमें व्यस्त हो जाएंगे यानी फीस मामले में अब जल्द कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।
बैठक का समय मांगने के लिए फाइल डीएम को भेजी थी। फाइल आई है, अभी देखी नहीं है। जैसे निर्देश होंगे वैसा किया जाएगा।
-डॉ. अचल कुमार मिश्रा, डीआईओएस
अफसर फीस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते। फीस मामले में एक बार फिर फाइल दफ्तर-दफ्तर चक्कर काटेगी। शैक्षिक सत्र समाप्त होने वाला है ऐसे में पेेरेंट्स राहत की उम्मीद कैसे कर सकता है। वार्ता के बहाने फिर कार्रवाई नहीं हो पाएगी।
-अंकुर सक्सेना, जिला शुल्क समिति में अभिभावक प्रतिनिधि