बरेली। ‘परिवार नियोजन में साझेदारी, अब होगी पुरुषों की सक्रिय भागीदारी’ यह स्लोगन परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करने की ओर साफ-साफ इशारा कर रहा है, जिसको लेकर अब तक पुरुष उदासीन बने हुए हैं। जो देश की बढ़ती जनसंख्या की गति पर विराम लगाने में रोड़ा प्रतीत हो रहा है। इस बात का खुलासा हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए पखवाड़ा से हुआ। करीब 15 दिन तक लगातार जिले में अभियान चलाया गया। प्रचार प्रसार और अन्य सुविधाओं पर करीब एक लाख रुपये खर्च करने के बावजूद सिर्फ एक ही पुरुष ने नसबंदी कराई।
स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों के मुताबिक पुरुष रूढ़ीवादी सोच के चलते नसबंदी से दूर भाग रहे हैं। जिले में पिछले पांच वर्षों में करीब 600 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई, जबकि इसकी तुलना में 52 हजार से अधिक महिलाओं ने परिवार नियोजन में सक्रिय भागेदारी की। हाल ही में जिले में 90 हजार रुपये का बजट खर्च कर पुरुष नसबंदी पखवाडे़ का प्रचार-प्रसार किया गया। पखवाड़ा के शुरू के सात दिन प्रचार और बाद के सात दिन नसबंदी के लिए तय हुए थे। आखिरी दिन समापन का तय था। इस कवायद में अच्छा खासा स्टाफ लगाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग महज एक पुरुष की ही नसबंदी करा पाया। संबंधित रिपोर्ट शासन को स्वास्थ्य महकमे ने भेज दी है।
महिलाओं से ज्यादा है प्रोत्साहन राशि
नसबंदी के प्रति पुरुष सजग हों इसके लिए प्रोत्साहन राशि की भी व्यवस्था है। जो महिलाओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से अधिक है। फिर भी पुरुषों में सजगता नहीं बढ़ रही। सरकार की ओर से प्रति नसबंदी कराने वाले व्यक्ति को 3000 रुपये देने की व्यवस्था है। वहीं प्रेरक को 400 रुपये दिए जाते हैं, लेकिन इस सब के बावजूद नसबंदी के सालाना आंकड़ों में कोई खास इजाफा नहीं।
महिला नसबंदी की तुलना में पुरुष नसबंदी का प्रतिशत बेहद कम है। पखवाड़े में एक ही नसबंदी हुई। स्वास्थ्य कर्मी प्रेरक का कार्य कर रहे हैं, लेकिन असर नहीं दिखाई दे रहा है।
- डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ