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ट्रेनों का खाना जंगल में फेंकने से होती है हाथियों की मौत

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हाथियों की सुरक्षा को वन्य क्षेत्र से धीमी गुजरेंगी ट्रेनें
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लालकुआं के पास खाने के लालच में ट्रैक पर आए हाथी की हो गई थी मौत
बरेली। हाल ही में लालकुआं के पास ट्रैक पर आए हाथी की ट्रेन से कटकर मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। वन विभाग ने मामले की जांच में पाया कि लालकुआं-काठगोदाम समेत जंगल के अंदर से होकर गुजरने वाले रेलवे ट्रैक पर हाथी कैटरिंग स्टाफ द्वारा फेंका गया बचा खाना खाने आते हैं और फिर ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं। वन विभाग के इस खुलासे के बाद रेलवे ने जंगल वाले सेक्शनों में ट्रेनों की स्पीड 35 किलोमीटर प्रति घंटा रखने के निर्देश ऑपरेटिंग अनुभाग को दिए हैं। साथ ही कैटरिंग स्टाफ को इन सेक्शनों में रेलवे लाइन पर बचा खाना फेंकने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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इज्जतनगर के लालकुआं-रुद्रपुर, रामनगर-काशीपुर, लालकुआं-बाजपुर, लालकुआं-किच्छा और टनकपुर खटीमा सेक्शन में जंगलों के बीच से होकर ट्रेनेें गुजरती हैं। इनमें नई दिल्ली-काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस, उत्तराखंड संपर्क क्रांति, रानीखेत एक्सप्रेस लालकुआं से काठगोदाम के बीच करीब सौ किलोमीटर की स्पीड से चलती हैं। दो दिन पहले लालकुआं-गूलरभोज के बीच ट्रेन से कटकर एक हाथी की मौत हो गई थी। इससे पहले भी कई हाथी ट्रेन की चपेट में आ चुके हैं। वन विभाग की टीम ने जांच में पाया कि ट्रेनों का कैटरिंग स्टाफ बचा खाना जंगल में ट्रैक पर फेंक देता है। इसे खाने के लिए हाथी पटरी पर पहुंच जाते हैं। बुधवार को मुख्य वन संरक्षक जयराम की एडीआरएम बीके गुप्ता के साथ बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि पांच से 12 जून तक संवेदनशील और अतिसंवेदनशील स्थानों का चयन किया जाएगा। हाथियों के मूवमेंट वाली जगहों पर साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। उन इलाकों में ट्रेनें 35 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से गुजरेंगी। जंगल में रेलवे ट्रैक पर बचा खाना फेंकने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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