बरेली।किला पुल पर पीडब्ल्यूडी अफसरों के भ्रष्टाचार की इस कदर मार पड़ी है कि खुद अफसरों को अब यह भरोसा नहीं रहा है कि 40 साल पुराना यह पुल और कब तक अपना वजन संभाल पाएगा। दरअसल पुलों पर हर साल सड़क का रिन्युवल यानी उसकी पुरानी लेयर हटाकर नई लेयर बिछाई जाती है। पैसा बचाने के लिए साल दर साल किला पुल पर पुरानी लेयर हटाए बगैर नई लेयर बिछाने से इस पुल का सैकड़ों टन वजन बढ़ चुका है। अब अफसर घबरा रहे हैं कि सड़क के रिन्युवल से अब इस पुल का वजन और बढ़ा तो कहीं वह ढह ही न जाए। यही वजह है कि सड़क बुरी तरह टूट-फूट जाने के बावजूद पिछले तीन सालों से यहां सड़क का रिन्युवल नहीं किया गया है।
किला पुल की सड़क काफी खराब हो चुकी है। कई जगहों पर सड़क ऊबड़खाबड़ हो चुकी है। इससे वाहनों के बेकाबू होने का खतरा भी रहता है। सूत्रों के मुताबिक पिछले सालों में करीब 800 मीटर लंबे इस पुल पर जब-जब सड़क का रिन्युवल हुआ तो अफसरों ने नई लेयर बिछाने से पहले पुरानी सड़क को तोड़कर उसका मलबा नहीं हटाया। नतीजा यह है कि पुल पर बने फुटपाथ का लेवल तक धीरे-धीरे सड़क के बराबर आ चुका है। एक इंजीनियर के मुताबिक बताया कि एक क्यूबिक मीटर सड़क बनाने में 15 से 20 क्विंटल तक का वजन बढ़ जाता है। इससे यह दिक्कत भी पैदा हो गई है कि पुल के बीच छोड़ी जाने वाली बीसी लेयर भी सड़क के लेबल से नीचे हो गई है। भारी वाहनों के निकलने से पुल का सही ढंग से कंपन भी नहीं हो पा रहा है। इस सड़क का रिन्यूवल पिछले साल ही होना था, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने सड़क की नई लेयर बिछाने के बजाय उसकी मरम्मत ही कराई है।
किला पुल पर सड़क ऊंची-नीची तो हो ही गई है, पिछले साल बरसात में कई जगहों पर क्षतिग्रस्त भी हो गई थी। फिर भी अफसरों ने नई लेयर बिछाने के बजाय पैच वर्क कराकर मामला निपटा दिया। गहरे गड्ढों को ईंटों के टुकड़े डालकर भर दिया गया था। अब इस पुल का रिन्यूवल हुए चार साल हो चुके हैं। उबड़-खाबड़ पुल पर दौरान वाहनों के अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है।
अब चौपुला पुल का भी कर रहे हाल खराब
किला पुल की तरह कई सालों से चौपुला ओवरब्रिज की सड़क का भी रिन्यूवल ही नहीं कराया गया है। इस फ्लाईओवर की सड़क का रिन्यूवल भी तीन साल से लंबित है। बताते हैं कि पीडब्ल्यूडी ने पुल की इस सड़क के नवीनीकरण का प्रस्ताव ही नहीं भेजा है। बता दें कि पुलों के रिन्युवल के लिए पीडब्ल्यूडी को हर साल शासन से मोटी धनराशि मिलती है जिसका अफसरों के बीच बंदरबांट हो जाता है। शहर की दूसरी सड़कों पर सुरक्षा उपाय के लिए पांच करोड़ की धनराशि को भी पीडब्ल्यूडी कई महीनों से दबाए बैठा है, जिस कमिश्नर भी उसके अफसरों का जवाबतलब कर चुके हैं।
इस बार यह कोशिश की जा रही है कि किला पुल पर नई लेयर बिछाने से पहले उसकी पुरानी सड़क तोड़ दी जाए। इस पर बगैर इसके सड़क बिछाना ठीक नहीं। इसका प्रस्ताव जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।
- राकेश राजवंशी, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
बारिश में फिर परीक्षा लेगी किला-चौपुला रोड
बरेली। पिछली बरसात में जलभराव से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई किला-चौपुला रोड पर तमाम हादसे होने के बाद खुद पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने जलभराव वाले हिस्से में सीसी रोड बनवाने की जरूरत बताई थी, लेकिन फिर खुद ही इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। टूटे हिस्से पर फिर हाटमिक्स सड़क बनाकर खानापूरी कर दी गई। बारिश का मौसम फिर आ रहा है लेकिन पीडब्ल्यूडी ने सीमेंटेड रोड बनाने का प्रस्ताव शासन को अब तक नहीं भेजा है।
इस सड़क पर सिटी स्टेशन और मालगोदाम के सामने होते हुए जसौली नाले की पुलिया तक हर साल काफी पानी भरता है। सड़क से सटकर बने नाले की काफी ऊंचाई है। इससे बारिश का पानी इसमें जाने के बजाय सड़क पर जलभराव हो जाता है। नगर निगम ने अब तक इस नाले से पैदा हो रही समस्या दूर नहीं की है। इससे इस बार भी यह सड़क जलभराव से फिर टूटेगी। पीडब्ल्यूडी ने किला-चौपुला रोड पर करीब एक किलोमीटर हिस्से को सीमेेंट से बनाने का सर्वे किया तो लगभग दस करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान आंका गया था, लेकिन इसके बाद इस सड़क को बनाने की सुध नहीं ली गई। अब तक सीसी रोड बनाने का प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा गया है। यह एस्टीमेट अगर अब फौरन भी पास हो जाए तो सड़क बनाने में डेढ़ से दो माह लगेंगे।
किला-चौपुला पर सिटी स्टेशन के पास सीसी रोड बनना जरूरी है, क्योंकि जलभराव से डामर की सड़क का टिक पाना संभव नहीं है। इस संबंध में जल्द ही प्रस्ताव भेजा जाएगा। कोशिश है कि बरसात से पहले यह काम पूरा करा लिया जाए। -राकेश राजवंशी, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी