अमर उजाला बरेली की स्थापना के 50 गौरवशाली वर्ष पूरे होने पर आयोजित म्यूजिक नाइट में प्रख्यात कवि कुमार विश्वास ने सोमवार को कविता और सुरों की महफिल जमाई। स्थापना दिवस पर 17 जनवरी को शुरू हुए जश्न में ‘म्यूजिकल नाइट विद कुमार विश्वास’ का आयोजन एग्जीक्यूटिव क्लब में हुआ। कवि और राजनेता कुमार विश्वास ने जब मंच संभाला तो पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कविताओं के जरिये प्रेमियों के प्रेम को दुलारा तो नेताओं पर तीखे व्यंग्य बाण भी किए। इससे पूर्व बीएल एग्रो के स्वतंत्र निदेशक एएन सिंह, फ्यूचर इंस्टीट्यूट के चेयरमैन मुकेश गुप्ता, डायरेक्टर जनरल मनीष शर्मा, फनसिटी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, उनकी पत्नी, पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन एवं उनकी पत्नी पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन ने दीप प्रज्ज्वलन किया। इस दौरान कमिश्नर रणवीर प्रसाद समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
कुमार विश्वास ने जब मंच संभाला तो उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कविता, कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है.. से श्रोताओं को जोड़ना शुरू किया और फिर जैसे-जैसे वह आगे बढ़े लोगों से वाहवाही मिलने लगी। भीषण सर्दी के बीच एग्जीक्यूटिव क्लब का ग्राउंड श्रोताओं से खचाखच भरा था। अपनी इसी कविता में उन्होंने नया मुक्तक पढ़ा, हर एक कपड़े का टुकड़ा, मां का आंचल हो नहीं सकता.. जिसे दुनिया को पाना हो वो पागल हो नहीं सकता।
देश की राजनीति और राजनेता भी उनके खूब निशाने पर रहे। कहा मप्र. में तो कांग्रेस धोखे में जीत गई, जनता को कमल पर मुहर लगानी थी कंफ्यूजन में कमलनाथ पर लगा दी। इस बीच चाय वाला गुजरा तो बोले कि इसे टोक भी नहीं सकते, पता नहीं कब प्रधानमंत्री बन जाए और हमें मार्गदर्शक मंडल में डाल दे। कार्यक्रम में देर से आने वालों को भी चुटीले अंदाज में हंसने पर मजबूर कर दिया।
युवाओं का दिल छुआ तो मी टू पर कसा तंज
युवाओं के दिल तो छूते हुए सुनाया, किसी के दिल की मायूसी, जहां से होके गुजरी है.. हमारी सारी चालाकी वहीं पर खोके गुजरी है, तेरी और मेरी रातों में बस फर्क है इतना.. तुम्हारी सोके गुजरी है और मेरी रोके गुजरी है। लोगों को गुदगुदाते हुए कहा, एक बार फाइव स्टार में 16 तरह की तकिया सुइट में बेड पर लगी थीं, समझ नहीं आ रहा था किसका क्या करूं..बेड इतना बड़ा था तो पतंजलि के सारे आसन लगा लिए मगर होटल वाली बच्ची से तकिया के बारे में न पूछा कि कहीं ‘मी टू’ में फंसा दे। फिर चाय के नाम पर लोगों को खूब हंसाया, कहा- फाइव स्टार में चाय मांगो तो गरम पानी के साथ ताबीज और लूडो जैसी चीनी की गोटियां आ जाती हैं।
शहीदों की तारीफ, केजरीवाल पर तंज
कहा- भारत माता जब शीश मांगती है तो पहला सिर हमारे यहां से चढ़ता है। साथ में मुक्तक जोड़ा, भरोसा बस तुम्हारा था, तुम्हारा कर लिया मैंने.. लहर है हौसला है रब है दुआएं हैं.. किनारा करने वालों से किनारा कर लिया मैंने। इसके बाद जब उन्होंने गुनगुनाया, कोई दीवाना कहता है... तो लोगों ने भी सुर से सुर मिलाकर महफिल को जोश से भर दिया।
देश के दो नेता चर्चा में हैं..
राजनीति पर तंज कसा कि देश के दो नेता चर्चा में हैं, एक जो प्रधानमंत्री हैं और दूसरे जो प्रधानमंत्री बनने की लाइन में हैं। इन पर दो लाइनें पढ़ीं, स्वयं से दूर हो तुम भी, स्वयं से दूर हैं हम भी..बहुत मशहूर हो तुम भी, बहुत मशहूर हैं हम भी.. बड़े मगरूर हो तुम भी, बड़े मगरूर हैं हम भी, अत: मजबूर हो तुम भी, अत: मजबूर हैं हम भी..
जीएसटी, स्वच्छता और टैक्स का सेलिब्रेशन
जीएसटी के नाम पर व्यापारियों को गुदगुदाया। कहा- पहला आदमी देखा जिसने टैक्स का भी सेलिब्रेेशन करा दिया। व्यापारियों को गुदगुदाया, बहीखाते में जीएसटी है, मगर दिल में मोदी है। स्वच्छता पर चुटीला तंज कसा, भाइयों-बहनों.. स्वच्छता होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए, हां कह दिया तो पांच प्रतिशत स्वच्छता का भी टैक्स लग गया। मगर मानसिकता में परिवर्तन न होने को लेकर स्वच्छता पर भी तंज कसा।
प्रेम और राजनीति
चार लाइनों को सुनाकर उनका राजनीतिक रूपांतरण सुनाया। इस अधूरी कहानी का क्या फायदा, बिना कथानक कहानी का क्या फायदा, जिसमें धुलकर नजर भी न पावन बने, ऐसे पानी का आंखों में क्या फायदा.. फिर इन लाइनों का राजनीतिक रूपांतरण किया, पहली लाइन राहुल के लिए, इस अधूरी जवानी का क्या फायदा फिर मोदी पर तंज कसा, बिना कथानक कहानी का क्या फायदा। इसके अपने वाले कहकर केजरीवाल पर निशाना साधा, जिसमें धुलकर नजर भी न पावन बने.. आंख में ऐसे पानी का क्या फायदा। फिर सुनाया, दिल बिना देवता की काशी है, जिसके हर घाट पर उदासी है, कुछ चटका हुआ है मुझमें भी, तु भी कितने जनम की प्यासी है।
किशन सरोज और प्यार का गीत
गीतकार किशन सरोज को याद करते हुए सुनाया, जख्म सिलते रहो प्यार हो जाएगा, गुल से खिलते रहो प्यार हो जाएगा, तुम जमाने से पूछो न मेरा पता, मुझको सुनते रहो प्यार हो जाएगा..। इसके बाद राधा-कृष्ण के प्रेम पर लिखे मुक्तक को सुनाया, तुम्हारी राधा को भान है मोहन, तुम सकल चराचर में समाए हो, बस एक मेरा भाग्य है मोहन, जिसमें होकर भी तुम नहीं हो..।
मोदी, योगी और केजरीवाल..
कुमार विश्वास ने अपने चुटीले अंदाज में तीनों ही नेताओं पर व्यंग्य बाण छेड़े। कहा वो कहते हैं.. न खाऊंगा न खाने दूंगा। योगी की एंटी रोमियो का मजाक बनाया, न करता हूं न करने दूंगा और फिर केजरीवाल पर कहा, हमारा वाला तो.. अपना भी फैलाया है, तुम्हारा भी फैलाऊंगा। संसद में राहुल गांधी के मोदी से गले मिलने पर भी चुटीला प्रहार किया।
उद्देश्य पर गीत और अमेरिका पर तंज
राजनीति के उद्देश्य पर कहा- सबसे ऊपर देश फिर विचार और उसके बाद पार्टी रखिए। फिर सुनाया, एशिया के हम परिंदे, आसमां है हद हमारी, जानते हैं चांद सूरज जिद हमारी-हद हमारी.. बेटों पर पिता के अधिकार एवं प्रेम को एनआरआई के माध्यम से जोड़ा और कहा- हमने बताया कि जीने का असल अंदाज क्या है.. महक क्या है, रंग क्या है, रूप क्या है..। अमेरिका पर तंज कसा और भारतीयों का हौसला बढ़ाया, हमने दुनिया में मुहब्बत का असर जिंदा किया है.. इन तरक्की के खुदाओं ने डर को घर बनाया है.. हम न आते तो तरक्की इस कदर न बोल पाती, हम न आते तो ये दुनिया खिड़कियां न खोल पाती।
सहयोग के लिए धन्यवाद..
अमर उजाला के 50 गौरवशाली वर्ष पूरे होने पर बीएल एग्रो के सहयोग से आयोजित ‘म्यूजिकल नाइट विद कुमार विश्वास’ के प्रायोजक श्री सिद्धि विनायक एवं कैनविज इंडस्ट्रीज लिमिटेड और सह प्रायोजक एसआरएमएस, राजश्री, फ्यूचर इंस्टीट्यूट, पार्क सिटी एवं डीजी इन्फ्रा रहे। इसके अलावा बेवरेज पार्टनर वृंदावन बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड (कोका कोला) और सहयोगी रामकुमार अग्रवाला ज्वेलर्स, कामर्शियल टोयोटा एवं फन सिटी थे। आउटडोर पार्टनर एडटेक प्रिंट एंड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और हॉस्पिटेलिटी पार्टनर द मैनोर बने। वेन्यू पार्टनर एक्जीक्यूटिव क्लब को बनाया गया। रामा श्यामा, मनीलम डेकोरेटिव पैनल, ग्रोवर मोटर्स, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, तनिष्क, केईओ, पुस्तक भंडार, द लाव्या होटल एंड रेस्टोरेंट, एलआईसी, केसीएमटी, महावीर इंडस्ट्रीज, एएनए, बैंक ऑफ बड़ौदा, ज्योति कॉलेज, विद्या भवन, बेदी इंटरनेशनल स्कूल एवं चौधरी हरनाम सिंह महाविद्यालय कार्यक्रम के बहुमूल्य सहयोगी थे।