बरेली। बिजली विभाग में कनेक्शन काटने और जोड़ने का धंधा खूब हो रहा है। विभागीय मिलीभगत से ठेकेदार फर्म कनेक्शन काटे बगैर ही लाखों रुपये का भुगतान ले रही हैं। मामला पकड़ में आने के बाद उनका भुगतान रोक दिया गया है। साथ ही विभाग ने जांच शुरू करा दी है।
पॉवर कारपोरेशन पांच हजार रुपये से ज्यादा बकाया वाले घरेलू और कॉमर्शियल कनेक्शन काटने का अभियान कई साल से चला रहा है। मैनपावर की कमी के चलते विभाग ने निजी फर्मों को इसका ठेका दे रखा है। इसके लिए उन्हें फीडर के हिसाब से लक्ष्य और बकायेदारों की सूची मुहैया कराई जाती है। हर दिन औसतन 20 कनेक्शन काटे जाते हैं। कनेक्शन काटने संबंधी प्रक्रिया का सत्यापन संबंधित उपकेंद्र का जेई करता है। बरेली समेत विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे ठेके दे दिए गए। फर्मों को भुगतान भी होते रहे, लेकिन बहेड़ी विद्युत वितरण खंड में फर्मों ने कागजों पर कनेक्शन काट दिए और जेई से लेकर ऊपर तक वेरिफिकेशन भी हो गया। यही नहीं, मुख्यालय से भुगतान के लिए करीब 52 लाख रुपये का बजट भी मंगा लिया गया। इसकी भनक जेई संगठन को लगी तो मामला खुला। जेई संगठनों द्वारा जब लाखों रुपये के घोटाले का मामला ऊपर तक पहुंचा तो अफसरों ने भुगतान रोका और धनराशि भी मुख्यालय को लौटा दी।
रिकार्ड से ज्यादा काट दिए कनेक्शन
बहेड़ी विद्युत वितरण खंड में न्यू अमन ट्रेडर्स और तराना कांट्रेक्टर फर्म ने वर्ष 2017-18 में बकायेदारों के कनेक्शन काटने का ठेका लिया था। विभाग ने निर्धारित शर्तों पर 28 हजार कनेक्शन काटने का काम दे दिया। विभाग ने यह काम 20 भागों में दो-दो लाख रुपये के दिए थे, इसके तहत आवंटित फीडरों पर बकायेदारों के कनेक्शन काटे जाने थे। बकायेदारों की सूची भी विभाग ने दी थी। बताया जाता है कि इन फर्मों ने फीडर पर मौजूद कनेक्शन से अधिक कनेक्शन बिना फोटोग्राफी कराए काट डाले। जब यह घोटाला हो रहा था तब अधिशासी अभियंता राम भुजारत थे।
यह है नियम
बिजली बकायेदार अगर बिल जमा नहीं करता तो मौके पर ही कनेक्शन अस्थाई तौर पर काटा जाता है। कनेक्शन काटने से पहले और बाद में वहां पर फोटोग्राफी बकायेदार अथवा उसके प्रतिनिधि के सामने की जाती है, जिससे पता चल सके कि अमुक बकायेदार पर ही कार्रवाई हुई है। कनेक्शन काटने के बाद बकायेदार को लाल रंग की रसीद (डिस्कनेक्शन स्लिप) दी जाती है, जिसमें बकाया बिल राशि और मीटर रीडिंग आदि दर्ज होती है।
प्रति कनेक्शन पर 142 रुपये देय
विभागीय अनुबंधन के अनुसार ठेकेदार फर्म को 142 रुपये प्रति कनेक्शन मिलता है। एक फीडर पर औसतन 14 सौ कनेक्शन होते हैं। इनमें औसतन आधे कनेक्शनों पर बकायेदारी होती है।
भुगतान पाने को दांवपेंच शुरू
पिछले वर्ष से रुका भुगतान पाने को दोनों फर्मों ने सार्वजनिक उपक्रम व निगम संयुक्त समिति में गुहार लगाई है। इसके सभापति रामचंद्र यादव ने मामला जोरदार तरीके से पॉवर कारपोरेशन चेयरमैन के सामने रखा है। यह फर्में न्यायालय में भी दस्तक दे चुकी हैं। मुख्यालय स्तर पर निदेशक स्तर का प्रमुख अफसर भी इन फर्मों का सहयोग कर रहा है, लेकिन प्रबंध निदेशक संजय गोयल ने कह दिया कि कनेक्शन काटने के सापेक्ष में ही भुगतान किया जाए। फर्जीवाड़ा में शामिल अथवा मनमानी करने वाले अधिकारी बख्शे नहीं जाएंगे।
बकायेदारों के कनेक्शन काटने में हुए फर्जीवाड़ा के दौरान मैं बहेड़ी खंड में तैनात नहीं था। इसकी जांच चल रही है। अभिलेखों से साफ है कि कनेक्शन काटने के ठेकों में गड़बड़ी तो हुई है।
- अनुज गुप्ता, एक्सईएन, बहेड़ी