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मॉडल रोड : फिलहाल तो जानलेवा खतरों का ‘मॉडल’

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बरेली। निगम अफसरों की अनदेखी के चलते करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे मॉडल रोड का ‘मॉडल’ ही जानलेवा हो गया है। अधूरे डिवाइडर से बाहर निकली सरिया कभी भी किसी के लिए मुसीबत बन सकती हैं। काम की गति बेहद धीमी होने के चलते अन्य तमाम खामियां भी हैं। नाले का न तो निर्माण पूरा हुआ है और न ही जल निकासी के लिए कहीं कनेक्टिविटी की गई है। अमर उजाला की टीम ने सोमवार को जब यहां का जायजा लिया तो हालात खराब और लोग इससे परेशान नजर आए।
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मेयर उमेश गौतम ने करीब साल भर पहले डीडीपुरम से शील चौराहे तक की सड़क को मॉडल रोड घोषित कर इसे विकसित करने की घोषणा की थी। साढ़े चार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में सड़क का चौड़ीकरण, अंडरग्राउंड बिजली लाइन, डिवाइडर, सर्विस लेन, नाला आदि का काम कराया जाना था। काम शुरू तो हो गया लेकिन निगम अफसर इस प्रोजेक्ट को लेकर उदासीन रहे। इसके चलते कभी यहां हरे-भरे पेड़ काट दिए गए तो कभी अन्य अव्यवस्था सामने आईं। काम की गति धीमी होने के चलते यहां का डिवाइडर कभी भी जानलेवा साबित हो सकता है। किसी भी वक्त अगर कोई बाइक या स्कूटी सवार इस सड़क पर फिसलकर अधूरे डिवाइडर पर गिरा तो बाहर निकली सरिया बड़े हादसे का सबब बनेंगी।

धर्मस्थल के चलते अटका नाला
शील चौराहे से डीडीपुरम की ओर बनने वाले नाले का निर्माण कार्य अधर में है। डीडीपुरम चौराहे की ओर बना धर्मस्थल नाले में आड़े आया तो ठेकेदार ने नाले का काम वहीं पर छोड़ दिया। ऐसे में यहां जलनिकासी की समस्या पैदा हो गई है।
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चौराहे पर खोदा नाला, हादसे का डर
शील चौराहे पर सफाई के नाम पर नाले को खोदकर छोड़ दिया गया है। यहां पर कोई संकेतक या स्टॉपर नहीं लगाया गया है। ऐसे में अगर कोई तेज रफ्तार वाहन यहां से गुजरा तो हादसा होना तय है। जगह-जगह डिप भी खुले पड़े हैं।

नाले बनाए, कनेक्टिविटी नहीं की
मॉडल रोड के दोनों ओर बड़े नाले बनाए गए हैं लेकिन यह अब तक अधूरे हैं। साथ ही इन नालों की कहीं कनेक्टिविटी भी नहीं की गई है, जिसके चलते बरसात के दिनों में जलभराव होना तय माना जा रहा है।

सर्विस लेन में भर गया पानी
हाल ही में मॉडल रोड की सड़क और सर्विस लेन बनाई गई है। मगर लेवल ठीक न होने से सर्विस लेन में जगह-जगह पानी भरा है। अगर यहां पानी भरा रहेगा तो कोलतार से बनी सड़क जल्दी ही उखड़ जाएगी।

कभी भी गिर सकता है पेड़
इस रोड पर ग्रीन बेल्ट भी विकसित की जानी है। मगर यहां पाकड़ के एक विशालकाय पेड़ की मिट्टी को चारों से काटकर हटा दिया गया है। ऐसे में बरसात के दौरान हवा चलने पर पेड़ के धराशायी होनेे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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