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‘आका’ ये क्या ! रुकना तो दूर .. घर पर चिपका गए निलंबन आदेश

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बरेली। राजनीतिक रसूख के दम पर सर्विस का अधिकांश समय मंडल में काट लेने के साथ जिला अस्पताल के सीएमएस पद पर पिछले दो साल से अधिक समय से जमे डा. केएस गुप्ता के सितारे बच्ची की मौत पर मुस्कराने के बाद ऐसे गर्दिश में आए कि ‘आका’ भी उन्हें बचा नहीं पाए। कार्रवाई के बाद भी तीन दिन तक कुर्सी पर जमे रह कर ‘आका’ से निलंबन रद्द कराने की गुहार लगाते रहे, लेकिन निलंबन रद्द होना तो दूर ‘आका’ निलंबन आदेश के नोटिस को डा. गुप्ता के घर पर चस्पा करने से भी नहीं रोक सके।
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विशारतगंज क्षेत्र के गोकिलपुर निवासी सुरेंद्रपाल की पांच दिन की बच्ची उर्वशी की इलाज में टालमटोल के बाद बुधवार हुई मौत ने बीते पांच दिन में स्वास्थ्य विभाग में हलचल मचाकर रख दी। प्रीमेच्योर उर्वशी को उसका पिता बुधवार को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया था। जिला अस्पताल के ओपीडी में डा. एसएस चौहान ने बच्ची को देखा, लेकिन उसे बिना उपचार किए जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया। सुरेंद्रपाल जब बच्ची को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे तो वहां मौजूद डा. सौरभ ने रेडिएंट वार्मर और फोटो थेरेपी बेड उपलब्ध न होने का हवाला देकर वापस जिला अस्पताल की इमरजेंसी के लिए रेफर कर दिया। बच्ची का पिता तीन घंटे तक दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों से इलाज की भीख मांगता रहा, लेकिन इलाज नहीं मिला। नतीजतन उसकी मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद जब पिता अपना दुखड़ा रोने सीएमएस डॉ. गुप्ता के पास पहुंचा तो संवेदना जताने के बजाय मुस्करा कर उससे सवाल जवाब करते रहे। उनकी इस संवेदन हीनता पर बुधवार शाम ही सीएम के निर्देश पर डा. गुप्ता को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन ‘आका’ की बदौलत उन्हें निलंबन आदेश तामील ही नहीं कराया गया। निलंबन के बाद भी बुधवार रात दस बजे तक कार्यालय खुलवा कर वह अपने बचाव के लिए अभिलेखों में जुगत ढूंढते रहे। एडी हेल्थ ने जब दो संयुक्त निदेशकों को जांच के लिए भेजा तो भी वह उनसे अपनी खामियां छिपाकर उनका ध्यान जिला महिला अस्पताल की ओर मोड़ने की कोशिश करते रहे। डीएम से भी हकीकत छिपाने की कोशिश की, लेकिन सब कुछ बेपर्दा हो जाने पर दोनों ही ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में डा. गुप्ता ही अधिक कुसूरवार ठहराए गए। इसके बाद भी डा. गुप्ता अपने को बेगुनाह बताते हुए कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हुए। लोगों का मानना था कि डा. गुप्ता इस कार्रवाई के बाद कार्यालय में नहीं बैठेंगे, लेकिन अगले दिन गुरुवार को वह पूरी हनक के साथ दफ्तर पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि उनके ‘आका’ सब मैनेज कर लेंगे। निलंबन के तीसरे दिन शासन से आए जिले के प्रभारी अधिकारी/आबकारी आयुक्त पी. गुरु प्रसाद जब जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे, उस दिन भी डा. गुप्ता अपने कार्यालय में कुर्सी पर जमे थे। लेकिन तीन दिन बाद भी जब ‘आका’ की ओर से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो सीएमएस डॉ. गुप्ता शनिवार कार्यालय नहीं पहुंचे और दो दिन की छुट्टी पर चले गए। अस्पताल के लोगों में चर्चा थी कि इन दो दिनों में डॉ. गुप्ता के ‘आका’ निलंबन रुकवाने में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन निलंबन रद्द कराना तो दूर, उनके ‘आका’ घर पर निलंबन आदेश चस्पा कराना तक नहीं रुकवा सके। रविवार को एडी हेल्थ ने उनके घर पर निलंबन और तामीला नोटिस चस्पा करा दिया।

पिछले साल तो कामयाब रहे... इस बार चूक गए डॉ. गुप्ता
गंभीर बच्चों को जिला अस्पताल से जिला महिला अस्पताल रेफर करने का ये खेल पहली बार नहीं हुआ था। पिछले कई दिन से डा. गुप्ता के इशारे पर यह खेल चल रहा था। वजह ये थी कि पिछले साल जिले में मलेरिया से कई लोगों की मौत होने पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ ने जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। उस समय भी सीएमएस की कुर्सी पर डा. गुप्ता तैनात थे। उस निरीक्षण में ‘आका’ साथ थे, लिहाजा अव्यवस्था का ठीकरा जिला महिला अस्पताल की तत्कालीन सीएमएस डा. साधना सिंह के सिर फोड़ दिया गया। डा. गुप्ता कुछ ऐसा ही डा. अलका शर्मा के साथ करना चाहते थे। डा. अलका भी इसको लेकर सशंकित तो रहती ही थीं, लेकिन सतर्क भी। यही वजह रही कि बुधवार बच्ची की हुई मौत मामले में उनके ऊपर निलंबन की गाज गिरने से बच गई और बच्ची की मौत के बाद मुस्कराने वाले डा. गुप्ता अपने बुने जाल में खुद फंस गए। इसकी एक वजह ये भी रही कि इस बार मामले का संज्ञान सीधे मुख्यमंत्री ने लिया था। इस लिए डा. गुप्ता के साथ-साथ उनके कथित मौखिक निर्देशन में गंभीर शिशुओं को जिला महिला अस्पताल टरकाने वाले बाल रोग विशेषज्ञ डा. चौहान को भी इसका खामियाजा निलंबित होकर भुगतना पड़ा।
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डा. अलका के आंसुओं का भी देना पड़ सकता है हिसाब
बरेली। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस शनिवार को अपने कार्यालय में ही डा. गुप्ता की ज्यादती बयां करते हुए फूट-फूट कर रो पड़ी थीं। हालांकि बच्ची की मौत मामले में उन पर भी लापरवाही का आरोप लगा है और उनके खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन विभागीय जांच शुरू होने पर वह अपनी पीड़ा जांच अधिकारी के सामने जब रखेंगी तो उस जांच में बच्ची की मौत मामले के साथ एक नया अध्याय दो अस्पतालों के सीएमएस के बीच तकरार का भी खुल सकता है। यदि ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर इसकी भी गाज डा. गुप्ता पर गिर सकती है।
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