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जांच अधिकारी पता नहीं कर पाए, ग्रामीण बताने लगे दोषी आशाओं के नाम

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बरेली। अर्क नं. चार में स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के बिना आशा वर्कर की बैठक बुलाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। इसके चलते ग्रामीण खुद ही अधिकारियों को शिकायत भेजकर आशाओं के नाम बता रहे हैं। मंगलवार को एसीएमओ को प्राप्त हुई शिकायत में दो आशा वर्कर पर अर्क नं. चार अस्पताल के लिए कमीशन का प्रलोभन देकर मीटिंग कराने का आरोप लगाया गया है। सीएमओ ने शिकायत को डॉ. रंजन गौतम को भेजकर जांच में शामिल करने को कहा है।
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पिछले दिनों महिला अस्पताल की सीएमएस ने आशा वर्कर का खेल पकड़ा था। सामने आया था कि कमीशन के चक्कर में वे गर्भवती को निजी अस्पताल पहुंचा रही हैं। सीएमएस ने महीने भर सीएमओ को पत्र भेजकर इस पर कार्रवाई की भी मांग की। मगर कार्रवाई के बजाय अर्क नं. चार अस्पताल प्रशासन ने आशा वर्कर को बुलाकर उनसे मीटिंग जरूर कर ली। सीएमएस की शिकायत पर सीएमओ की टीम पहुंचने तक आशा वर्कर जा चुकी थीं। मामले की जांच के लिए सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम को जिम्मेदारी दी। कार्रवाई के तमाम दावे किए गए लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। जांच अधिकारियों ने अस्पताल से मीटिंग के दिन की सीसीटीवी फुटेज तक लेने की जहमत नहीं उठाई।
वहीं, नवाबगंज की गंगवार कॉलोनी निवासी नरेश चंद्र गंगवार के नाम से सीएमओ को पत्र मिला है। उन्होंने क्षेत्र की दो आशा वर्करों के नाम बताते हुए अर्क नं. चार में बुलाई मीटिंग में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल ने इस पत्र को भी जांच में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। सीएमओ का कहना है कि शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर न लिखा होने से जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि अर्क नं. चार अस्पताल प्रशासन ने नोटिस का जवाब भेजा है, उसका परीक्षण किया जा चुका है। एक-दो दिन में जांच आख्या सीएमओ को सौंप दी जाएगी।
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