बरेली। माधवबाड़ी स्थित श्री रामायण मंदिर में चल रही रसमयी श्रीमद् भक्तमाल कथा के पांचवें दिन बाबा चित्र विचित्र ने सार्थक आनंद का मर्म बताया। कहा, मनुष्य तमाम भौतिक सुविधाएं मिलने पर भी परेशान है, क्योंकि इच्छाओं का कोई अंत नहीं है। उन्होंने सार्थक आनंद के लिए भौतिक सुख को त्यागकर सच्चे हृदय से प्रभु की आराधना का सुझाव दिया।
कहा, सुमिरन से जीवात्मा की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और साधक भवसागर से पार हो जाता है। ‘वृंदावन जाने वालों, बांके बिहारी के नाम मेरा पैगाम ले जाओ’ ‘..श्याम चले आते हैं भक्तों के घर’ भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर किया। जगदीश भाटिया ने ‘मेरी जिंदगी में क्या था तेरी बंदगी से पहले, मैं बुझा हुआ दिया था तेरी बंदगी से पहले’ सुनाया। प्रसाद वितरण कर बुधवार को कथा का समापन हुआ। ब्यूरो