बरेली। अहम की लड़ाई में उलझे नगर निगम के जिम्मेदारों ने व्यवस्थाओं को ताक पर रख दिया है। हर ओर अव्यवस्था का आलम है। चक महमूद के खैराती बाग कब्रिस्तान से गुजर रहा नाला साल भर से उफना रहा है। जलभराव की वजह से सैकड़ों कब्रें बैठ गई हैं। लोगों की शिकायत पर शनिवार को अमर उजाला की टीम ने जब यहां का जायजा लिया हालात काफी बदहाल नजर आए। कब्रिस्तान का करीब आधा हिस्सा अब भी नाले के गंदे पानी से जलमग्न है।
कांकरटोला से जोगीनवादा जाने वाले चक महमूद में खैराती बाग कब्रिस्तान है। आसपास के लोगों ने बताया कि क्षेत्र का यह सबसे बड़ा और सबसे पुराना कब्रिस्तान है। यहां दो सौ साल पुरानी कब्रें हैं, लेकिन निगम की लापरवाही से अब यहां कब्रों की दुर्दशा हो रही है। कब्रिस्तान के बीच से निकलने वाला नाला करीब साल भर से उफना रहा है और क्षतिग्रस्त भी है, जिसके चलते कब्रिस्तान का करीब आधा हिस्सा कई महीने से जलमग्न है। नगर निगम में कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन नाले की मरम्मत नहीं कराई गई। अब जलभराव से तमाम कब्रें बैठ गई हैं। जहां पानी सूख गया, वहां की कब्रें लोगों ने ठीक कर दीं हैं। बाकी तमाम कब्रें अब भी पानी में डूबी हुई हैं।
सफाई के बाद कब्रिस्तान में छोड़ी गंदगी
लोगों ने बताया कि कुछ दिन पहले नगर निगम की टीम ने नाले का कुछ हिस्सा साफ किया। मगर सफाई के बाद निकली सिल्ट आदि वहीं पर छोड़ दी। उन लोगों ने टीम से मलबा हटाने को कहा, लेकिन किसी ने नहीं सुना।
बरसात में हो जाता है नर्क, आती है बदबू
कब्रिस्तान की देखरेख करने वाले जमील उल्ला खां ने बताया कि बरसात के दौरान यहां काफी पानी भर जाता है, जिसके चलते लोग अपने बुजुर्गों की इबादत भी नहीं कर पाते हैं। पानी भरने के चलते यहां बदबू भी आने लगती है। कीड़े-मकोड़े का डर भी बना रहता है। मगर निगम अफसर समस्या का समाधान नहीं कर रहे।
ईद पर नहीं कर सके बुजुर्गों की इबादत
पास में ही रहने वाले चंगेज खां ने बताया कि उनके सारे बुजुर्गों की कब्रें यहीं पर हैं। जलभराव से तमाम कब्र डूब गई हैं जिसके चलते ईद पर भी तमाम लोग अपने बुजुर्गों की कब्र पर जाकर दुआ नहीं कर सके। नगर निगम में वह साल भर से यहां की समस्या के लिए शिकायत कर रहे हैं लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
कब्रिस्तान में जलभराव होने की मुझे जानकारी नहीं है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी को वहां की समस्या दुरुस्त कराने के निर्देश दिए जाएंगे।
- ईश शक्ति सिंह, प्रभारी नगर आयुक्त