शाही। राशन कार्ड के लिए तमाम महीनों भटकते रहे बुजुर्ग लतीफ मियां की संवेदनहीन सिस्टम ने पहले तो ‘कुर्बानी’ ले ली और जब उनकी मौत की खबर मिली तो गर्दन बचाने के लिए उनके घर अपना नुमाइंदा भेज दिया। सुबह 11 बजे ही लतीफ मियां के घर पहुंचे तहसील के लेखपाल मोरपाल गंगवार ने पहले तो उनके बेटे शब्बू के बयान दर्ज करने का ड्रामा किया, फिर आवेदन देने की बात कहते हुए जल्द राशन कार्ड बनवाने का आश्वासन दिया, लेकिन शब्बू ने राशन कार्ड बनवाने से साफ इनकार कर दिया। बोला- अब राशन कार्ड की जरूरत नहीं है। अब्बा की हसरत थी कि राशन कार्ड बन जाता तो परिवार को दो वक्त की रोटी आसानी से मिलती रहती, वह अधूरी हसरत लिए दुनिया से विदा हो गए। अब परिवार में दो लोग ही बचे हैं, जैसे भी होगा गुजारा कर लेंगे।
लतीफ मियां की मौत इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि आठ महीने पहले वह समाधान दिवस में डीएम के सामने पेश हुए थे। डीएम को उन्होंने राशन कार्ड के लिए महीनों से दर-दर भटकने का पूरा वाकया सुनाया था और उनसे यहां तक कह दिया था कि वह अगर उनका राशन कार्ड नहीं बनवा सकते तो उन्हें गोली ही मार दी जाए क्योंकि भूख से तिल-तिल कर मरने के बजाय एक बार में मर जाना उनके लिए बेहतर होगा। डीएम ने इसके बाद उन्हीं के सामने पूर्ति विभाग के अधिकारियों को उनका राशन कार्ड बनाने का आदेश दिया था, लेकिन एक खास ‘व्यवस्था’ के तहत राशन कार्ड बनाने के आदी पूर्ति विभाग ने न लतीफ मियां का राशन कार्ड बनाया न अफसरों ने खबर ली कि समाधान दिवस की शिकायत का समाधान आखिर क्यों नहीं हुआ। शुक्रवार को राशन कार्ड की हसरत लिए हुए ही लतीफ मियां दुनिया से रुखसत हो गए। बेटे के मुताबिक उसके अब्बू डीएम से शिकायत के बाद भी काफी समय तक तहसील और नगर पंचायत कार्यालय के चक्कर काटते रहे। फिर भी राशन कार्ड नहीं बना तो काफी मायूस हो गए। कुछ समय से बुढ़ापे की वजह से बीमारी ने घेर लिया तो दौड़भाग बंद हो गई।
..और यह रिपोर्ट हाथ के हाथ- भूख से मौत नहीं हुई
लतीफ मियां का राशन कार्ड तो सालों में नहीं बन पाया लेकिन तहसील स्टाफ ने अपने अधिकारियों को यह रिपोर्ट भेजने में जरा भी देर नहीं लगाई कि लतीफ मियां की मौत भूख से नहीं बल्कि बीमारी से हुई है। शुक्रवार को लतीफ मियां की मौत के बाद यह खबर अमर उजाला में छपी तो शनिवार सुबह 11 बजे ही तहसील से लेखपाल मोरपाल गंगवार ने उनके घर पहुंच गए। लेखपाल ने उनके बेटे शब्बू से बातचीत की। शब्बू ने बताया कि उसके अब्बू बीमार थे। पैसे की कमी और गरीबी की वजह से वह उनका इलाज नहीं करा पा रहा था। इसके बाद लेखपाल की ओर से एसडीएम को अपनी रिपोर्ट भेज दी गई जिसमें बताया गया है कि लतीफ मियां की मौत भूख से नहीं बल्कि बीमारी से हुई है। आपूर्ति विभाग का कोई कर्मचारी लतीफ मियां के घर नहीं पहुंचा।
सप्लाई इंस्पेक्टर की जुबां पर अफसरों की भाषा- जांच कराऊंगा
लतीफ मियां के तमाम चक्कर काटने के बावजूद जिस पूर्ति विभाग की मनमानी से उनका राशन कार्ड नहीं बना, उसी पूर्ति विभाग का स्टाफ अब भी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। हद तो यह है कि लतीफ मियां का राशन कार्ड न बनने के लिए सीधी तौर पर जिम्मेदार सप्लाई इंस्पेक्टर अवधेश सिंह की जुबां पर भी बड़े अफसरों जैसी भाषा है। अवधेश सिंह का कहना है कि कस्बे के पात्र लोगों की जल्द ही नगर पंचायत से सत्यापन रिपोर्ट लेकर एक सप्ताह के अंदर उनके राशन कार्ड बनाए जाएंगे। लतीफ का राशन कार्ड अब तक क्यों नहीं बनाया गया, इसकी जांच कराई जाएगी। बोले- लतीफ के बेटे के परिवार का राशन कार्ड तीन दिन के अंदर बनवा दिया जाएगा।