बरेली। जिला अस्पताल में इलाज के अभाव में गर्भवती की मौत के मामले में जांच पूरी हो गई है। इसमें ईएमओ, फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय को दोषी पाया गया है। सीएमएस ने ईएमओ को चेतावनी देकर आगे ऐसी घटना होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, फार्मासिस्ट को इमरजेंसी से हटाकर वेटिंग में रखा है और वार्ड ब्वॉय को निलंबित कर दिया है।
पिछले दिनों सुभाषनगर के अंगुरी निवासी सात माह की गर्भवती ममता को परिजन महिला अस्पताल में भर्ती कराने आए थे। जांच के बाद लेबर पेन के बजाय सीने में दर्द की जानकारी देकर महिला अस्पताल की डॉक्टर ने उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया। परिजन का आरोप था कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बगैर जांच किए लेबर पेन बताकर उन्हें महिला अस्पताल जाने को कहा। विरोध किया तो ईएमओ, फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय नोकझोंक करने लगे। करीब घंटे भर तक चली नोंकझोंक के बीच दर्द से कराह रही गर्भवती की मौत हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई। टीम ने ईएमओ डॉ. हरीश चंद्रा, फार्मासिस्ट अंकित यादव, वार्ड ब्वॉय नरेंद्र को प्रथम दृष्टया दोषी पाया। इस पर सीएमएस ने वार्ड ब्वॉय को निलंबित कर ईएमओ और फार्मासिस्ट के खिलाफ चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक को रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई को लिखा है।
महिला अस्पताल के दोषियों पर कार्रवाई की संस्तुति
जिला अस्पताल के दोषियों पर सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता ने तत्काल कार्रवाई कर दी है। वहीं, महिला अस्पताल में इलाज मुहैया न कराने पर उन्होंने महिला अस्पताल की सीएमएस को संबंधित कर्मचारी-अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। उन्होंने कहा कि अगर महिला अस्पताल में गर्भवती को फौरी तौर पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच जाती।