बरेली। आला हजरत दरगाह प्रकरण का पटाक्षेप होते-होते रह गया। सुलहनामा पर मंगलवार को मोहर लगनी थी, लेकिन एक पक्ष की अनुपस्थिति के चलते समझौता लटक गया है। माना जा रहा है कि अब इस मुद्दे पर बुधवार को फैसला हो सकता है।
दरगाह की रजा मस्जिद में दो जून को खत्म शरीफ के जलसे में मारपीट की घटना के बाद खानदान के दो पक्षों में विवाद हो गया था। सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी (अहसन मियां) ने नबीरे आला हजरत मौलाना उमर रजा खां (अंजुम मियां) और उनके बेटे शीरान रजा खां के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। दोनो पक्षों में बयानों के माध्यम से आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। इसी बीच 6 जून को अहसन मियां के मुरीदों का दरगाह पर जमावड़ा हुआ तो अंजुम मियां ने 7 जून को अहसन मियां के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। इससे विवाद और बढ़ गया। हालांकि समझौते के प्रयास शुरू के कारण फिलहाल बयानबाजी का दौर बंद है। चार दिनों से समझौते की कोशिश में लगे रहे तंजीम उलमा इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी और दूसरे लोगों की बदौलत सार्थक नतीजे सामने आने लगे। दरगाह के सरपरस्त सुब्हानी मियां के मॉरीशस से लौटने के बाद एक सुलहनामा तैयार किया गया। इस सुलहनामे पर मंगलवार को मोहर लगनी थी, लेकिन एक पक्ष के न होने की वजह से यह मामला टल गया है।