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पहले भीषण गर्मी... शाम को आंधी और बारिश, पेड़ गिरे

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बरेली। पिछले कई दिनों से चल रही भीषण गर्मी के बाद अचानक इस तरह बारिश होगी, इसका अनुमान मौसम वैज्ञानिक भी नहीं लगा पाए। बिना किसी पूर्वानुमान लगातार हो रही गर्मी से बने स्थानीय सिस्टम के चलते शाम को अचानक आसमान में काली घटा छा गई। तेज रफ्तार से हवा चली, जो थोड़ी देर में धूल भरी आंधी में तब्दील हो गई। फिर 15 से 20 मिनट तक झमाझम बारिश हुई। आंधी-बारिश में कुछ पेड़ भी गिरे, लेकिन शाम को मौसम खुशगवार हो गया। अगले दो से तीन दिन भी आसमान में बादल छाए रहेंगे। बूंदाबांदी या बारिश की संभावना कम है।
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बृहस्पतिवार को सुबह 5 बजकर 15 मिनट पर सूर्योदय होने के बाद रोजाना की तरह चटक धूप निकली। आद्रता कम होने से पूरे दिन भीषण गर्मी पड़ी। दिन का अधिकतम तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया, जो सामान्य से 2.0 डिग्री सेल्सियस अधिक था। रात का न्यूनतम तापमान भी 28.8 डिग्री सेल्सियस पर रहा, जो बीते दिनों में अधिक है। पूरे दिन भीषण गर्मी के बाद शाम को पांच बजे के बाद अचानक काली घटा छा गई। थोड़ी ही देर में तेज रफ्तार से चली हवा धूल भरी आंधी में तब्दील हो गई। फिर देर शाम 15 से 20 मिनट तक झमाझम बारिश हुई। आईवीआरआई में ओले गिरने की बात कही गई। इससे मौसम खुशगवार हो गया। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा ने बताया कि प्री-मानसून बारिश पूर्वानुमान के विपरीत हुई है क्योंकि अभी बारिश होने की कोई उम्मीद नहीं थी। डॉ. कुशवाहा के अनुसार भीषण गर्मी पड़ने और आद्रता कम होने से कभी-कभी स्थानीय स्तर पर बादल बनकर बरस जाते हैं। इनका पूर्वानुमान चार से पांच घंटे पहले ही लग पाता है। डॉ. कुशवाहा के अनुसार अब अगले दो से तीन दिन आसमान में बादल रहेंगे, लेकिन बारिश की उम्मीद न के बराबर हैं। बशर्ते कि कोई स्थानीय सिस्टम न बने। आंधी और बारिश से डोहरा रोड पर एक पेड़ गिर गया। अन्य इलाकों में भी पेड़ गिरने की खबरें मिली हैं।

खरीफ फसलों को जबरदस्त फायदा
आईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रनजीत सिंह का कहना है कि प्री-मानसून बारिश लगभग सभी फसलों के लिए लाभदायक है। धान की पौध को सर्वाधिक राहत मिलेगी। नई पौध डालने के लिए खेतों में नमी हो गई है। किसान सीधे बुवाई भी कर सकते हैं। बारिश से आम की फसल में बढ़ोत्तरी तेज होगी। फल का वजन और स्वाद भी बढ़ेगा। अरहर की फसल की बुवाई भी किसान कर सकते हैं। खेतों में नमी होने से बीजों का जमाव बेहतर होगा। ढैंचा की फसल भी बढ़वार पकड़ेगी। ढैंचा 45 दिन का होने पर किसान को उसे काट लेना चाहिए। बेल वाली सब्जियों में अधिक तापमान होने की वजह से नर फूल अधिक मात्रा में आ रहे थे। अब तापमान कम होगा तो मादा फूलों की संख्या बढे़ेगी। सब्जियों का उत्पादन भी बढ़ेगा। मेंथा में तेल उत्पादन बढ़ेगा। बारिश के दस दिन बाद मेंथा की कटाई की जा सकती है। किसानों को खरीफ फसल बुवाई के लिए सिंचाई का खर्च बचेगा।
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