बरेली। ईद-उल-फितर की नमाज पुरअमन और अकीदत भरे माहौल में अदा की गई। बाकरगंज ईदगाह पर कड़ी धूप में हजारों लोगों ने नमाज अदा की। यहां नमाज अदा कराने से पहले काजी उल कुज्जात शहजादे ताजुश्शरीया मुफ्ती असजद रजा खां असजद मियां ने अपनी तकरीर में मुल्क भर के मुसलमानों से अपील की कि वे आपस में इत्तेहाद रखें और अपने बच्चों को दुनियावी तालीम के साथ दीनी तालीम जरूर दें। उन्होंने इस्लामी दायरे में रहकर जिंदगी गुजारने की भी ताकीद की। नमाज के बाद देर तक एक-दूसरे को गले लगकर मुबारकबाद देने का सिलसिला चलता रहा।
बाकरगंज ईदगाह पर मुफ्ती अफजाल रजा ने ईदुल फितर के मसले बयान किए। यहां आला हजरत खानदान के अलावा कोलकाता और बंगलूरू के मुरीदों समेत हजारों लोगों ने नमाज अदा की। नमाज के बाद दरगाह आला हजरत और दरगाह ताजुश्शरीया पहुंचकर हाजिरी दी। उनके साथ जमात रजा मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान हसन खान, मुफ्ती आशिक हुसैन, समरान खान, मोईन खान, डॉ. मेंहदी हसन सैयद कैफी आदि थे। शहर की दूसरी मस्जिदों में भी सुबह छह बजे से 11 बजे तक नमाज अदा करने का सिलसिला चला। इसी तरह शाही जामा में मस्जिद में शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम, दरगाह आला हजरत की रजा मस्जिद में कारी गौस अहमद शमसी ने नमाज अदा कराई। आखिर में मौलाना तौसीफ रजा खां ने दुआ की।
खानकाह नियाजिया की गरीब नवाज मस्जिद में सज्जादानशीन शाह हसनैन नियाजी उर्फ हसनी मियां ने नमाज अदा कराई। इससे पहले वह खानवादों और मुरीदों के साथ रिवायत के मुताबिक शाही अंदाज में नमाज अदा कराने पहुंचे। उनके साथ नायब सज्जादा हाजी शाह मेंहदी मियां, प्रबंधक शब्बू मियां भी थे। सुनहरी मस्जिद में कारी गुलाम यासीन ने नमाज अदा कराई और खानकाह वामिकिया के सज्जादा नसीन मौलाना असलम मियां वामिकी ने दुआ की। दरगाह वली मियां की चांद मस्जिद में नमाज के बाद हजरत वली मियां की फातेहा ख्वानी हुई। मदरसा काशीफुल उलूम की मस्जिद में मुफ्ती मोहम्मद मियां कासिमी, शिया जामा मस्जिद में इमाम मौलाना शमसुल हसन खां ने नमाज अदा कराई। इसके अलावा नौमहला और खन्नू मोहल्ला की दादा मियां मस्जिद में नमाज के बाद बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खान वारसी ने अपने साथियों के साथ नमाजियों को मुबारकबाद पेश की।
याद आए ताजुश्शरीया
ईदगाह पर ताजुश्शरीया हजरत अख्तर रजा खां अजहरी मियां की कमी खली। इससे पहले अजहरी मियां ही हमेशा ईदगाह पर नमाज अदा कराया करते थे। पिछले साल उनका विसाल होने के बाद यह पहली ईद जिसमें उनके बजाय उनके बेटे असजद मियां ने नमाज अदा कराई। अजहरी मियां के मुरीदों और नमाज अदा करने आए लोगों ने उन्हें इस मौके पर याद भी किया। ईद की नमाज के लिए सुबह से शहर के रास्तों पर कतारें नजर आने लगी थीं। नमाज के बाद सभी ने एक दूसरे को गले मिल कर मुबारकबाद पेश की।