बरेली। देश की खातिर जान जोखिम में डालने वाले सैनिकों की कॉलोनी भी बदहाली का शिकार है। निवासियों ने कई बार मूलभूत सुविधाओं के लिए नगर निगम और प्रशासनिक अफसरों के चक्कर काटे, लेकिन नतीजा सिफर रहा। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने संजय नगर स्थित सैनिक कॉलोनी का जायजा लिया तो अव्यवस्था के बीच पूर्व सैनिक दिन गुजारते दिखे। बदहाली का आलम यह कि 20 साल पहले बसी इस कॉलोनी में अब तक पक्की सड़क तक नहीं बनी है।
संजय नगर से गुजरकर पीलीभीत बाईपास से मिलने वाली सड़क से सटी सैनिक कॉलोनी की गली नंबर छह में टीम पहुंची। स्थानीय निवासियों के मुताबिक करीब 20 साल पहले यह कॉलोनी बसी थी। उस दौरान कॉलोनी के मुख्य मार्ग पर खड़ंजा और अंदर की गलियां मिट्टी डालकर बनाई गई थीं। वे ही सड़कें आज भी आवागमन का साधन हैं। निवासियों ने पक्की सड़क बनाने के लिए नगर निगम को करीब दर्जनों बार ज्ञापन सौंपा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शहर को स्ट्रीट लाइट से जगमग करने का दावा भी इस कॉलोनी तक नहीं पहुंचा। काफी मशक्कत के बाद करीब दो साल पहले गली नंबर चार में स्ट्रीट लाइट लगी, जो कुछ दिन बाद ही खराब हो गई, ठीक कराने के लिए नगर निगम में ज्ञापन सौंपा तो प्रकाश विभाग की टीम आयी और स्ट्रीट लाइट ही निकालकर ले गई। दो साल गुजर गए, लेकिन वह स्ट्रीट लाइट वापस नहीं आई। कॉलोनी में जल निकासी के लिए बनाई गई नालियों पर स्लैब बनाकर उन्हें ढक दिया गया है, जिससे नालियां साफ न होने से हल्की सी बारिश में भी जलभराव हो जाता है।
सीलिंग की जमीन पर अवैध कब्जा
निवासियों के मुताबिक कॉलोनी में नगर निगम के अफसर, पार्षद और नेताओं की मिलीभगत से सीलिंग की जमीन पर भूमाफिया अवैध कब्जे कर रहे हैं। इसलिए शिकायत के बाद भी अवैध कब्जा हटाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई। क्षेत्र में पानी की टंकियां टूट रहीं हैं तो कई घरों में पानी का कनेक्शन नहीं है फिर भी वे टैक्स का भुगतान कर रहे हैं।
दस साल से नहीं पहुंचा है सफाई कर्मी
शुरुआत में कॉलोनी बसी तो खाली पड़े क्षेत्र को निवासियों ने कूड़ेदान बना दिया। अब जब मैदानों में ‘कंक्रीट के जाल’ बन गए हैं तो नाला ही कूड़ेदान बन गया है। निवासियों के मुताबिक पिछले करीब दस सालों से कॉलोनी में सफाईकर्मी नहीं पहुंचा है। समस्या बढ़ने पर निजी सफाईकर्मी रखा गया है, जो घर-घर से कूड़ा उठाने के मासिक सौ रुपये लेता है।
सड़क बनाने के लिए नगर निगम में प्रस्ताव दिया गया है, टेंडर निकलेगा तो सड़क का निर्माण शुरू हो जाएगा। सफाई कर्मियों की संख्या कम होने से क्षेत्र में सफाई कार्य प्रभावित है। - अनुपम चमन, पार्षद
कॉलोनी में पक्की सड़क बनाने के लिए कई बार नगर निगम में ज्ञापन दिया गया है, लेकिन अब तक सड़क नहीं बनी। निजी सफाईकर्मी रखा गया है, जिसे मासिक भुगतान करते हैं। - पीके बनर्जी, निवासी
कॉलोनी में डस्टबिन न होने से सभी लोग कूड़ा नाले में फेंकते हैं, जिससे नाला चोक होेने से बारिश में जलभराव हो जाता है। लाइट खराब हुई तो फिर कोई सुनवाई नहीं होती। - संतोष कुमार सिंह, पूर्व सैनिक
सैनिक कॉलोनी की गली संख्या 1 से 10 तक कहीं-कहीं ही स्ट्रीट लाइट लगी हैं। उसमें भी 90 फीसदी खराब हैं। क्षेत्र में फॉगिंग न होने से बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। -भवानी दत्त मिश्रा, पूर्व सैनिक